चंडीगढ़/अमृतसर। पंजाब की सियासत और सिख धार्मिक जगत में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ करार देते हुए कड़ा रुख अपनाया है। यह फैसला उस विवादित वीडियो को लेकर लिया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री पर गुरु घर और ‘गुरु की गोलक’ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे हैं।
दो फोरेंसिक रिपोर्टों का हवाला देकर सुनाया फैसला
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने पांच सिंह साहिबानों की बैठक के बाद फसील से आदेश जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की दो अलग-अलग फोरेंसिक लैब से जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट में वीडियो के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या एआई तकनीक के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई। इसके आधार पर सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया गया।
‘अकाल तख्त के सामने सच नहीं रखा’
ज्ञानी गर्गज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले स्वयं वीडियो की जांच के लिए सहमति जताई थी, लेकिन बाद में अकाल तख्त सचिवालय को कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में अकाल तख्त के समक्ष असत्य बयान दिया, जो बेहद गंभीर विषय है।
29 जून को सभी सिख विधायक और पंजाब कैबिनेट होंगे पेश
अकाल तख्त ने बेअदबी विरोधी कानून को लेकर भी पंजाब सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। आदेश के अनुसार, किसी भी दल से जुड़े सभी सिख विधायकों और पंजाब मंत्रिमंडल को 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित होना होगा। उनसे ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ पर जवाब मांगा जाएगा।

बेअदबी कानून पर पहले से जताई जा चुकी है आपत्ति
अकाल तख्त और एसजीपीसी का कहना है कि इस कानून को सिख पंथ से व्यापक चर्चा किए बिना लागू किया गया। धार्मिक संस्थाओं ने मांग की है कि अधिनियम की उन धाराओं को हटाया जाए, जिन्हें गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और संगत की भावनाओं के विपरीत माना जा रहा है।
13 अप्रैल को विधानसभा से सर्वसम्मति से पास हुआ था विधेयक
पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल 2026 को ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ को सर्वसम्मति से पारित किया था। इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के दोषियों के लिए आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
AAP का पलटवार, जत्थेदार पर लगाए राजनीतिक आरोप
अकाल तख्त के फैसले से पहले आम आदमी पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि जिन फोरेंसिक रिपोर्टों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की स्पष्ट पहचान का उल्लेख नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने राजनीतिक पक्ष चुन लिया है। पन्नू ने कहा कि अकाल तख्त पूरे सिख समुदाय की संस्था है, किसी एक राजनीतिक दल की नहीं।
क्यों अहम है यह फैसला?
मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर अकाल तख्त का यह निर्णय धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां इससे पंजाब की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है, वहीं बेअदबी कानून को लेकर सरकार और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच टकराव भी और गहरा सकता है।
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