अयोध्या। राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी के मामले के बीच सोमवार को बड़ा एक्शन हुआ। राम मंदिर ट्रस्ट ने अहम बैठक की और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कागभुशुंडी, हार, चरण-पादुका और सोने की परत वाली रामचरित मानस समेत उन चीजों को दिखाया गया, जिनके गायब होने का आरोप लगाया गया था।
बता दें कि चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद कई दानदाताओं ने दान में दी गई चीजों के गायब होने का दावा किया था। जिनमें रामलला को दान में मिला हीरे से जड़ा एक हार, सोने की एक चरण पादुका, चांदी से बनी कागभुशुंडी की प्रतिमा और 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी रामचरित मानस शामिल था। ट्रस्ट ने सारे दावों को सिरे से न सिर्फ खारिज किया सार्वजनिक रूप से सारे सामान भी दिखाए।
22 जुलाई को ट्रस्ट की अगली बैठक
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बताया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दोनों पदाधिकारियों ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को ट्रस्ट की अगली बैठक होगी। तब तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने की उम्मीद है, जिसके बाद नए ट्रस्टी और महासचिव की नियुक्ति पर निर्णय लिया जाएगा।
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चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार
गोविंद देव गिरी ने बताया कि कुछ पदाधिकारियों का मत था कि चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, जबकि वरिष्ठ विधिवेत्ता के. पाराशरण की राय थी कि इस्तीफा स्वतः प्रभावी माना जा सकता है। विचार-विमर्श के बाद ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए।
उन्होंने कहा कि कि दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना में अनियमितता से सभी न्यासी आहत हैं। प्रारंभिक जांच में जिन लोगों के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले, उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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चढ़ावे से जुड़े वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक
इस दौरान ट्रस्ट ने चढ़ावे से जुड़े वित्तीय आंकड़े भी सार्वजनिक किए। ट्रस्ट के अनुसार निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त 3,246 करोड़ रुपये में से 2,870 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण एवं पूंजीगत कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। वहीं स्थापना से 31 मार्च 2026 तक दानपात्रों और चढ़ावे के माध्यम से 482 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 311 करोड़ रुपये संचालन व्यय में खर्च किए गए हैं, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है।
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ट्रस्ट ने यह भी कहा कि नकद चढ़ावे के अलावा अब तक 2,126 भौतिक भेंटें प्राप्त हुई हैं, जिनका विधिवत पंजीकरण, भौतिक सत्यापन और ऑडिट कराया गया है। श्रद्धालु चाहें तो अपनी भेंट का सत्यापन भी ट्रस्ट से कर सकते हैं।
कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने कहा कि इस प्रकरण से ट्रस्ट और करोड़ों रामभक्त आहत हैं। उन्होंने माना कि प्रबंधन व्यवस्था में कुछ कमियां थीं, जिन्हें दूर कर अधिक पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली विकसित की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

