हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश में फसल बीमा क्लेम में कथित गड़बड़ी का एक बड़ा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। देवास और धार जिले के किसानों के बीमा दावों में हुई भारी हेरफेर को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें 944 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का दावा किया गया है।
आंकड़ों में व्यापक स्तर पर हेरफेर और धांधली
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कृषि बीमा कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को मिलने वाली बीमा राशि को रोकने का खेल खेला गया। इसके लिए फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiments – CCE) के आंकड़ों में व्यापक स्तर पर हेरफेर और धांधली की गई।
हाईकोर्ट से की गई प्रमुख मांगें
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सीबीआई (CBI) या हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। देवास और धार जिले के किसानों के लंबित व खारिज बीमा दावों का पुनः मूल्यांकन कराया जाए। इस पूरे मामले का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से विशेष ऑडिट कराया जाए ताकि वित्तीय अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सके। पीड़ित किसानों को उनकी पूरी और बकाया फसल बीमा राशि जल्द से जल्द प्रदान की जाए।
फैसला सुरक्षित रख लिया है
मामले की प्राथमिक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों और कृषि बीमा कंपनियों में हड़कंप मच गया है, वहीं किसानों की नजरें अब हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।

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