दिल्ली सरकार राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट करवाने की तैयारी में है।ऊर्जा मंत्री आशीष सूद (Ashish Sood) ने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में बिजली कंपनियों (Power Companies) के वित्तीय बोझ को जनता पर नहीं डालने देगी और इसके लिए सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि डिस्कॉम से जुड़े वित्तीय मामलों और खर्चों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए CAG ऑडिट जरूरी है। यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो सरकार आवश्यक कार्रवाई करेगी। साथ ही यह भी कहा कि दिल्लीवासियों को अतिरिक्त बिजली दरों का बोझ उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।

मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बिजली कंपनियों की ओर से करीब 38 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया जा रहा है, जिसकी सच्चाई सामने लाना बेहद जरूरी है। सरकार यह जानना चाहती है कि डिस्कॉम को वास्तव में इतना बड़ा घाटा हुआ भी है या नहीं। उन्होंने कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बिजली कंपनियां इतने भारी नुकसान में थीं, तो उन्होंने इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी। कथित घाटे के बावजूद कंपनियां अब तक अपना संचालन कैसे करती रहीं। सरकार इस मामले में सभी कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है। ऊर्जा मंत्री ने दिल्ली की जनता को भरोसा दिलाया कि बिजली कंपनियों के कथित घाटे का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार किसी भी हालत में बिजली के बिलों में बढ़ोतरी नहीं होने देगी और आम लोगों के हितों की रक्षा की जाएगी।

सरकार का निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए मास्टर प्लान तैयार

राजधानी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। सरकार वर्ष 2030 से पहले बिजली से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए करीब 17 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। दिल्ली में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है। सामान्य परिस्थितियों में वर्ष 2030 तक बिजली की मांग 11,600 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि विकसित दिल्ली के रोडमैप के तहत यह मांग बढ़कर 13,100 मेगावाट तक जाने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार बिजली नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि ट्रांसफॉर्मर और अन्य जरूरी उपकरणों की आपूर्ति में लंबा समय लगता है। किसी कंपनी को ऑर्डर देने के बाद ट्रांसफॉर्मर मिलने में 3-4 साल तक का समय लग जाता है। सूद ने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने समय रहते नए ट्रांसफॉर्मर खरीदने की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिसके कारण मौजूदा सरकार के सामने लगातार बिजली आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। दिल्ली सरकार अपनी पूरी क्षमता के साथ इस समस्या का समाधान करने में जुटी है। इसके तहत नए ट्रांसफॉर्मर, सब-स्टेशन और ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में बढ़ती मांग के बावजूद राजधानी में बिजली कटौती की स्थिति न बने।

पिछली सरकार पर साधा निशाना

दिल्ली सरकार ने राजधानी की बिजली व्यवस्था को लेकर पिछली सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आशीष सूद ने कहा कि पिछले एक दशक में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने न तो नए ट्रांसफॉर्मर बढ़ाने की दिशा में पर्याप्त काम किया और न ही पुराने हो चुके ट्रांसफॉर्मरों को बदलने की योजना पर गंभीरता दिखाई। मंत्री के मुताबिक, कई जगहों पर उधार लेकर ट्रांसफॉर्मर लगाए गए, लेकिन बिजली ढांचे को स्थायी रूप से मजबूत करने पर ध्यान नहीं दिया गया।

आशीष सूद ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए पिछली सरकार की ओर से कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन उनमें से अधिकांश परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकीं। इसका असर अब राजधानी की बिजली व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति यह है कि दिल्ली में लगभग 50% ट्रांसफॉर्मर 25 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं। ऐसे में बढ़ती बिजली मांग के बीच निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

मास्टर प्लान की प्रमुख बातें

राजधानी में नागरिकों को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लोगों को नया बिजली कनेक्शन तेजी से उपलब्ध कराया जाएगा और बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। बढ़ती जरूरतों को देखते हुए बिजली ग्रिड की क्षमता मांग के अनुसार बढ़ाई जाएगी। सरकार HVDS ट्रांसफॉर्मर की जगह LVDS ट्रांसफॉर्मर लगाने की दिशा में काम करेगी। स्थानीय स्तर पर बिजली खराबी आने पर उसे तुरंत ठीक करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। गलियों और रिहायशी इलाकों में बिजली ढांचे को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। सड़कों और कॉलोनियों में लटकी हुई बिजली की तारों को चरणबद्ध तरीके से भूमिगत किया जाएगा। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए रूफटॉप सोलर पैनल लगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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