Dharm Desk – आषाढ़ मास की अमावस्या इस बार दो दिन तक रहने वाली है. जिससे लोगों में यह भ्रम बना हुआ है कि पितृ कर्म, तर्पण और दान किस दिन करना अधिक शुभ रहेगा. जब भी त्योहार या पर्व दो तिथियां पर आता है तब उसके आने का समय और सूर्य उदय की स्थिति के आधार पर ही व्यवहार को मनाया जाता है. ऐसे में सही तिथि और उपाय जानना बेहद जरूरी है. आषाढ़ अमावस्या पर किए गए, ये उपाय पितरों को प्रसन्न करते हैं. पितरों के प्रसन्न होने से जीवन में आने वाली बढ़ाएं दूर हो जाती है. सही समय और विधि से किया गया तर्पण से पत्र प्रसन्न होते हैं और सुख समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देखते है.

- अमावस्या तिथि कब से कब तक?
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई को शाम 6:50 बजे से हो रही है और समापन 14 जुलाई को दोपहर 3:14 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार 14 जुलाई को अमावस्या मनाना श्रेष्ठ रहेगा.
- किस दिन करें पितृ कर्म
पितृ तर्पण, श्राद्ध और दान के लिए 14 जुलाई सबसे शुभ दिन माना गया है, क्योंकि इसी दिन सूर्योदय के समय अवमास्या तिथि रहेगी.
- स्नान-दान का शुभ मुहूर्त यह रहेगा
ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:11 बजे से 4:52 बजे तक स्नान और दान करना अत्यंत पुण्य रहेगा.
- पितृ पूजा का सही समय यह रहेगा
दोपहर 12 बजे से 12:55 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में पितरों की पूजा और तर्पण करने से विशेष फल प्राप्त होता है.
- पितृ दोष निवारण के उपाय
काले तिल, कुश और जल से तर्पण करें. पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और तिल के तेल का दीपक जलाकर पितरों का स्मरण करे. इससे पितृ दोष शांत होता है.
- शत्रु भय और आर्थिक संकट से मुक्ति
इस बार अमावस्या मंगलवार को है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा. इस दिन किए गए उपाय शत्रु बाधा और आर्थिक संकट को दूर करने में सहायक माने जाते हैं.
- दान-पुण्य और विशेष कार्य जरूरी
गरीबों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करें. ब्राह्मणों को भोनज कराएं और गाय को हरा चारा खिलाएं. गंगाजल से स्नान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है.
- हलहारिणी अमावस्या का महत्व
आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन किसान अपने कृषि उपकरणों और बैलों की पूजा कर अच्छी फलस की कामना करते है. यह समय खेती की शुरुआत का संकेत भी देता है.

