Haryana SC Loan Fraud : अंबाला: हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एचएससीएफडीसी) की स्वरोजगार ऋण योजना में फर्जी दस्तावेजों के सहारे लाखों रुपये का ऋण लेने का मामला सामने आया है। जांच के बाद पुलिस ने पूर्व जिला प्रबंधक समेत 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि आठ लोगों ने अपनी वास्तविक जाति की जानकारी छिपाकर फर्जी अनुसूचित जाति (SC) प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी ऋण योजना का लाभ उठाया।

मामला सामने आने के बाद निगम मुख्यालय पंचकूला से अधिकारियों ने इसकी जांच करवाई। जांच में सामने आया कि कुछ लाभार्थियों ने अपनी वास्तविक जाति से अलग दस्तावेज प्रस्तुत कर अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की योजनाओं के तहत स्वरोजगार के लिए ऋण हासिल किया।

जाति बदलकर लिया सरकारी ऋण

जांच के दौरान सामने आया कि आठ लोगों ने कथित तौर पर फर्जी या गलत तरीके से तैयार किए गए अनुसूचित जाति प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया। इनमें कुछ ऐसे लोग शामिल हैं, जो पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण और अन्य वर्गों से संबंधित बताए गए हैं, लेकिन उन्होंने खुद को अनुसूचित जाति का बताते हुए ऋण योजना का लाभ लिया।

इन लोगों ने अलग-अलग मामलों में 60 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का ऋण लिया। इस तरह सरकारी योजना के तहत लाखों रुपये की राशि हासिल की गई।

दस्तावेजों में छेड़छाड़ का भी आरोप

पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लाभार्थियों ने ऋण हासिल करने के लिए ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें उनकी जाति संबंधी जानकारी गलत थी। जांच में कुछ प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों को संदिग्ध पाया गया।

मामले में पूर्व जिला प्रबंधक की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। पुलिस ने लाभार्थियों के साथ पूर्व जिला प्रबंधक समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

420, 467, 468 और 471 के तहत कार्रवाई

पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार हुए, इन्हें ऋण आवेदन के साथ किस तरह इस्तेमाल किया गया और इस पूरे मामले में पूर्व जिला प्रबंधक की क्या भूमिका रही।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने से लेकर सरकारी ऋण मंजूर होने तक की पूरी प्रक्रिया खंगाली जा रही है। इससे इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।