अजयारविंद नामदेव, शहडोल। देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत को कम करने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। भाजपा सहित कई संगठन इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग और ईंधन बचत का संदेश दे रहे हैं। लेकिन शहडोल में एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। एक तरफ भाजपा कार्यकर्ता डीजल बचाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए जागरूकता रैली निकाल रहे थे, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के एक अधिकारी सरकारी वाहन से दूसरे जिले आकर पौधे खरीदते नजर आए।

मामला उमरिया जिले के नौरोजाबाद रेंज से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक रेंज ऑफिसर पियूष त्रिपाठी वन विभाग की शासकीय गाड़ी से उमरिया से शहडोल पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि वे शहडोल जिला जेल परिसर के बगल स्थित नर्सरी से करीब 10 पौधे खरीदने आए थे। इसी दौरान शहर में भाजपा द्वारा डीजल बचत, पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को लेकर जागरूकता रैली निकाली जा रही थी। ऐसे में सड़क पर एक साथ दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई दीं। एक तरफ ईंधन बचाने का संदेश और दूसरी तरफ सरकारी डीजल खर्च कर अधिकारी के पौधे खरीदने पहुंचने की घटना चर्चा में रही।
जब इस संबंध में रेंज ऑफिसर पियूष त्रिपाठी से चर्चा की गई तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधे लेने शहडोल आए थे। उनका कहना था कि शहडोल में बेहतर गुणवत्ता के पौधे उपलब्ध होते हैं, इसलिए यहां से पौधे खरीदे गए। हालांकि उनकी यह दलील लोगों के गले नहीं उतर रही।

लोगों का कहना है कि उमरिया जिला खुद घने जंगलों और वन संपदा के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में वन विभाग के अधिकारी का केवल 10 पौधों के लिए दूसरे जिले तक सरकारी वाहन लेकर आना सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग जैसा प्रतीत होता है। लोगों का कहना है कि जब सरकार खुद डीजल बचाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की बात कर रही है, तब जिम्मेदार अधिकारी ही विपरीत संदेश देते नजर आ रहे हैं।
पूरे मामले ने सरकारी वाहनों के उपयोग, डीजल खर्च और विभागीय जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी गाड़ियों का उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार हो रहा है या फिर नियमों को नजरअंदाज कर सरकारी डीजल को यूं ही फूंका जा रहा है।

