पटना। पूर्व विधायक अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। खास बात यह है कि आज ही दुलारचंद यादव की पहली बरसी भी है, जिनकी हत्या पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान कर दी गई थी।

​हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने पटना हाईकोर्ट द्वारा अनंत सिंह को दी गई जमानत के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में मांग की गई है कि अनंत सिंह की जमानत तुरंत प्रभाव से रद्द कर उन्हें वापस जेल भेजा जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर करते समय अनंत सिंह के लंबे आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज किया। राज्य सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर उनके खिलाफ दर्ज हत्या, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों का ब्योरा सौंपा है।

​चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी दुलारचंद की हत्या

यह घटना 30 अक्टूबर 2025 की है, जब बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा से जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों का काफिला आमने-सामने आ गया था। झड़प और हिंसा के बीच दुलारचंद यादव की जान चली गई थी। इस मामले में पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने चुनाव जीता और मार्च 2026 में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद बाहर आए थे।

​पार्टी से निष्कासन और आवास खाली करने का नोटिस

मामले के तूल पकड़ने के बाद जदयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। वहीं, बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने नीलम देवी को पटना स्थित 1, मॉल रोड का सरकारी आवास 25 नवंबर 2026 तक खाली करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, उनसे 20 सूत्री समिति की सदस्यता और राज्य मंत्री का दर्जा भी वापस ले लिया गया है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आज आने वाले रुख पर टिकी हैं।