अजय सैनी, भिवानी: हरियाणा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में मशहूर छोटी काशी यानी भिवानी की पावन धरा इन दिनों एक अनूठे भक्तिमय प्रवाह में डूबी हुई है। स्थानीय तपोभूमि परमहंस योगाश्रम धाम में श्रीश्री 1008 स्वामी भास्करानंद परमहंस महाराज की पावन पुण्यस्मृति में भव्य वार्षिक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस उत्सव के चलते पूरे क्षेत्र का माहौल पूरी तरह से आध्यात्मिक हो गया है। महोत्सव के तहत जहाँ हर दिन सुबह के समय पावन हवन यज्ञ और सत्संग की अमृतवर्षा हो रही है, वहीं इसी कड़ी में आयोजित हुए एक विशाल कवि सम्मेलन ने श्रद्धालुओं को राष्ट्रभक्ति और साहित्य के अनूठे रंग में सराबोर कर दिया।

कवि राजेश चेतन की कविताओं पर झूमे श्रद्धालु

इस भव्य कवि सम्मेलन में देश के जाने-माने अंतर्राष्ट्रीय कवि राजेश चेतन ने मुख्य आकर्षण के रूप में शिरकत की। मंच से राष्ट्रचेतना के स्वर को बुलंद करते हुए राजेश चेतन ने देश की माटी और अपनी मूल संस्कृति से जुड़ने का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें हर परिस्थिति में अपने राष्ट्र को सबसे ऊपर रखना चाहिए और उसे आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि देश की उन्नति में ही हम सभी नागरिकों का विकास छिपा है। हमारे महापुरुषों का जीवन हमें हमेशा यही सीख देता है। कवि सम्मेलन के दौरान जब राजेश चेतन ने अपनी बेहद प्रसिद्ध कविता राम वन गए तो बन गए का ओजस्वी पाठ किया, तो पूरा आश्रम परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और प्रभु के जयकारों से गूंज उठा। उनके अलावा देश के सुप्रसिद्ध कवि बलजीत कौर तन्हा, संदीप सर्ज और अंकुर अग्रवाल ने भी अपनी शानदार और मर्मस्पर्शी रचनाओं से समां बांध दिया।

संत कबीर का जीवन और वाणी समाज के लिए पथप्रदर्शक

कवि सम्मेलन से पहले आयोजित हुई सत्संग सभा में श्रद्धालुओं को ज्ञान का मार्ग दिखाते हुए तपोभूमि परमहंस योगाश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी कृष्णानन्द सरस्वती महाराज और मुख्य कथाव्यास स्वामी मदन मोहन अलंकार ने संत प्रवर कबीरदास के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संत कबीर जी केवल एक महान रामभक्त ही नहीं थे, बल्कि वे अपने समय के एक अद्वितीय समाज सुधारक भी थे। उन्होंने समाज में फैली तमाम कुरीतियों, पाखंड और जाति-पाति के भेद का हमेशा खुलकर विरोध किया और पूरी दुनिया को मानवता का सच्चा संदेश दिया।

सच्चे गुरु के महत्व को समझना आज के दौर में बेहद जरूरी

कथाव्यास ने आगे कहा कि कबीर जी ने हमेशा ईश्वर की निष्काम भक्ति को संसार में सबसे श्रेष्ठ और उत्तम माना है। उन्होंने अपने पूरे जीवन में सच्चे गुरु के महत्व का ही प्रचार-प्रसार किया। कबीर जी ने अपने बेहद सीधे, सरल और प्रेरणादायक दोहों के माध्यम से साधारण से साधारण इंसान को भी आसानी से परम ज्ञान का मार्ग दिखाया है। ग्रंथ भक्तमाल में भी कबीर जी को एक निडर, परम ज्ञानी और अनन्य संत के रूप में याद किया गया है।