न्यामुद्दीअली, अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले से लापरवाही और खौफ की एक ऐसी खबर सामने आई है जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। दक्षिण पूर्व कोलफील्ड लिमिटेड कोतमा जमुना क्षेत्र की बरतराई खदान से सटे ग्राम मलगा में स्थित पीएमश्री स्कूल के ठीक पास अचानक भरभराकर जमीन धंस गई। घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है क्योंकि इस स्कूल में 800 से अधिक मासूम छात्र-छात्राएं अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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खदान प्रबंधन ने ‘डेवलपमेंट एरिया’ बताकर पल्ला झाड़ा
जमीन धंसने की खबर सामने आते ही बरतराई खदान के प्रबंधक अनिल कुमार यादव और माइनिंग सरदार अपनी टीम के साथ मौके पर जरूर पहुंचे। मामले की गंभीरता को समझने के बजाय अधिकारियों ने इस खतरनाक गड्ढे को खदान का महज ‘डेवलपमेंट एरिया’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
प्रबंधन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि गड्ढे को जल्द भर दिया जाएगा, फेंसिंग की जाएगी और चेतावनी बोर्ड लगाया जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि यहां कोई ‘गोफ’ नहीं बनी है लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह खारिज करती है।
खतरनाक दरारें दे रही हैं बड़े हादसे को न्योता, सो रहा है राजस्व अमला
खदान प्रबंधन के खोखले आश्वासनों से स्कूली बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों का डर कम नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जमीन अचानक धंसी है और इसके आसपास के एक बड़े हिस्से में बेहद खतरनाक दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पूरी स्कूल बिल्डिंग भी जमींदोज हो सकती है।
पटवारी की घोर लापरवाही, ग्रामीणों में आक्रोश
इस संवेदनशील और आपातकालीन स्थिति के बाद भी क्षेत्र का हल्का पटवारी घंटों तक मौके पर नहीं पहुंचा जो जिला प्रशासन की घोर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है। पटवारी के नदारद रहने से ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और आक्रोश है।
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उच्च स्तरीय जांच और भू-वैज्ञानिक सर्वे की मांग
मासूम बच्चों और खुद की सुरक्षा को खतरे में देख अब ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। लोगों ने मांग की है कि खदान के कारण धंस रही इस जमीन की तुरंत उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जिला प्रशासन से पुरजोर अपील की गई है कि इस पूरे स्कूल परिसर और मलगा गांव का भू-वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए, ताकि कोई बड़ी जनहानि होने से पहले स्थिति को संभाला जा सके।

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