आर्ट ऑफ लिविंग की कैथल शाखा में चार दिवसीय एडवांस्ड मेडिटेशन प्रोग्राम का सफल समापन हुआ। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए साधकों ने मौन, सेवा और साधना का अभ्यास किया।

राकेश कथूरिया,कैथल। आर्ट ऑफ लिविंग की कैथल शाखा कपिस्थल आश्रम में आयोजित चार दिवसीय एडवांस्ड मेडिटेशन प्रोग्राम का सोमवार को बेहद आध्यात्मिक माहौल में विधिवत समापन हो गया। इस विशेष कार्यक्रम के संदर्भ में कपिस्थल आश्रम के सेक्रेटरी भारत खुराना ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह अनूठा शिविर प्रतिदिन सुबह 6.30 बजे से शुरू होकर लगातार चार दिनों तक संचालित किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में सत्संग, निस्वार्थ सेवा और गहरी साधना का एक अद्भुत एवं अनूठा संगम देखने को मिला। शिविर के दौरान सभी साधक अपनी नियमित योग क्रियाओं के साथ-साथ जीवनोपयोगी ज्ञान की पावन डुबकी भी लगाते रहे, जिससे पूरा वातावरण पूरी तरह से सकारात्मक और ऊर्जावान बना रहा।

मौन साधना और सात्विक आहार के फायदे

इस उच्च स्तरीय साधना कार्यक्रम की सबसे बड़ी और मुख्य खास बात यह रही कि इसमें सभी आवश्यक कार्य पूरी तरह से मौन में रहकर ही संपन्न किए गए। आध्यात्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्ण मौन धारण करने से हमारी आंतरिक संकल्प शक्ति में भारी वृद्धि होती है और हमारी तमाम क्रियाएं पहले से कहीं अधिक ऊर्जावान हो जाती हैं। शिविर के दौरान दिनभर आश्रम के पवित्र परिसर में ही रुककर सभी साधकों को केवल शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करने की ही सख्त अनुमति प्रदान की गई थी। यह सात्विक आहार मानव शरीर को अंदरूनी रूप से पूरी तरह साफ और विषमुक्त (डिटॉक्स) करता है, जिससे साधक स्वयं को बेहद हल्का और तरोताजा महसूस करते हैं।

मानसिक तनाव दूर करने का उत्तम माध्यम

इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य संचालक सिरसा से पधारे श्रद्धेय आचार्य राजीव जी रहे, जो पिछले कई दशकों से इस प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था में निरंतर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आचार्य राजीव जी ने साधकों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में साधना, सेवा और सत्संग को पूरी तरह से उतार लेता है, तो दुनिया में ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो उसके लिए असंभव हो। आज के इस आधुनिक और भागदौड़ भरे युग में लोगों में मानसिक तनाव बहुत अधिक बढ़ गया है, जिसे कम करने के लिए ही इस एडवांस्ड मेडिटेशन प्रोग्राम को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।