पटना। अरवल के सिविल सर्जन डॉ. राजकिशोर प्रसाद पर हुए हमले के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (BHSA) के आह्वान पर राज्यभर के सरकारी डॉक्टरों ने एकदिवसीय ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का ऐलान किया है। घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद हमलावरों की गिरफ्तारी न होने और डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम न उठाए जाने से पूरे प्रदेश के चिकित्सा जगत में भारी आक्रोश व्याप्त है।
घटना की पृष्ठभूमि और डॉक्टरों का आक्रोश
अरवल सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में हुई इस हिंसक घटना ने स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (BHSA) ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस कायराना हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की है। संघ का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात सरकारी डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय प्रशासन और पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
यदि चिकित्सक ही अपने कार्यस्थल पर असुरक्षित महसूस करेंगे तो इसका सीधा और प्रतिकूल असर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। भासा ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है जिससे डॉक्टरों का मनोबल गिर रहा है और उनमें प्रशासनिक उदासीनता के प्रति गहरा रोष है।
ओपीडी बंद, लेकिन इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी पूरी तरह सुचारू
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने स्पष्ट किया है कि बुधवार को राज्यभर के सभी सरकारी अस्पतालों, जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में ओपीडी (बाकी मरीजों की सामान्य जांच) सेवाएं पूरी तरह से बाधित और बंद रहेंगी।
हालांकि, आम जनता और गंभीर रोगियों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाओं को इस बहिष्कार से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। मरीजों की जान बचाने और उनकी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इमरजेंसी, प्रसव कक्ष (लेबर रूम), आईसीयू (ICU) और अन्य आवश्यक जीवन-रक्षक चिकित्सा सेवाएं पहले की तरह पूरी क्षमता के साथ सुचारू रूप से जारी रहेंगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और आगे की चेतावनी
डॉक्टरों के इस अचानक और एकदिवसीय ओपीडी बहिष्कार से सामान्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों को बिना दिखाए ही वापस लौटना पड़ सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। वहीं, दूसरी ओर भासा ने साफ कर दिया है कि उनका यह विरोध प्रदर्शन किसी भी रूप में मरीजों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह अस्पतालों में सुरक्षित कार्य वातावरण, न्यायोचित सुरक्षा प्रबंध और सम्मानजनक सेवा परिस्थितियों की मांग के लिए उठाया गया एक अनिवार्य कदम है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जा सकता है।


