Rajasthan News: राजस्थान की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी ही पार्टी के भीतर बुरी तरह घिर गए हैं। उनके पूर्व ओएसडी (OSD) लोकेश शर्मा ने गहलोत के साजिश वाले बयान पर ऐसा पलटवार किया है जिससे जयपुर से लेकर दिल्ली तक खलबली मच गई है।

लोकेश शर्मा ने सीधे तौर पर कहा कि गहलोत सरासर झूठ बोल रहे हैं। उनके खिलाफ किसी ने कोई साजिश नहीं रची थी। सच तो यह है कि वे खुद दिल्ली जाने से डर रहे थे। वह मुख्यमंत्री की कुर्सी किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते थे।
मुझे दिल्ली का सिस्टम समझ नहीं आता
लोकेश शर्मा ने एक बातचीत में गहलोत के कई राज खोले हैं। उन्होंने बताया कि जब कांग्रेस आलाकमान ने गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की पूरी तैयारी कर ली थी, तब गहलोत खुद इस जिम्मेदारी से भाग रहे थे। जयपुर के बंद कमरों में बातचीत के दौरान गहलोत अक्सर कहते थे, लोकेश, मुझे दिल्ली का सिस्टम समझ नहीं आता। वहां का पूरा ढांचा संभालना मेरे बस का नहीं है। राजस्थान मेरी रग-रग में बसा है और मैं यहीं रहना चाहता हूं।
कुर्सी छिनने का डर और जांच की चिंता
पूर्व ओएसडी के मुताबिक, गहलोत को सबसे बड़ा डर इस बात का था कि अगर वे दिल्ली चले गए और राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कोई दूसरा बैठ गया, तो उनके फैसलों की जांच शुरू हो सकती है। इसी डर के चलते उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति से दूरी बनाई। वह बस अपनी कुर्सी बचाए रखना चाहते थे।
हाईकमान को दी गई चुनौती
लोकेश शर्मा ने साफ कहा कि गहलोत हमेशा दबाव की राजनीति करते हैं। 25 सितंबर 2022 को जयपुर में जो हुआ, वह भी आलाकमान पर दबाव बनाने की रणनीति थी। उस दिन दिल्ली से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन पर्यवेक्षक बनकर जयपुर आए थे। विधायकों को मुख्यमंत्री निवास के बजाय शांति धारीवाल के बंगले पर इकट्ठा किया गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी को सामूहिक इस्तीफे सौंपे गए। यह सब इसलिए किया गया ताकि पर्यवेक्षक विधायकों से अकेले में बात न कर सकें। यह सीधे तौर पर हाईकमान को चुनौती थी।
हाथ से फिसल रही है रेत, जेब फट चुकी है
लोकेश शर्मा ने तीखे लहजे में कहा कि कांग्रेस के इतिहास में आज तक किसी नेता ने सोनिया गांधी और पार्टी को इस तरह साजिशकर्ता नहीं कहा। गहलोत ने जो किया वह बेहद निंदनीय है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर गहलोत खुद को जननायक मानते हैं, तो पार्टी से अलग होकर अपनी ताकत आजमा लें, उन्हें जमीन का पता चल जाएगा।
उन्होंने कहा अब आलाकमान को भी असलियत समझ आ गई है। इसीलिए उनसे दूरी बना ली गई है। गहलोत के बयान उनकी हताशा को दिखाते हैं। पिछले 40 साल से जिस राजस्थान कांग्रेस को उन्होंने अपनी जेब में रखा था, अब वह जेब फट चुकी है। कंट्रोल उनके हाथ से रेत की तरह फिसल रहा है।
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