सतीश सिंह, लखनऊ. एक दिन पूर्व बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती द्वारा आकाश आनंद की पार्टी में वापसी को लेकर उनके ससुर के राजनीतिक सन्यास लिए जाने की शर्त पर अशोक सिद्धार्थ ने सफाई दी है. उन्होंने राजनीतिक सन्यास लिए जाने का एलान करते हुए कहा है कि उनके सन्यास को आकाश आनंद की वापसी से न जोड़ा जाए.
गुरुवार को अशोक सिद्धार्थ ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती को संबोधित एक लंबा और भावुक पत्र सोशल मीडिया पर जारी किया है. पत्र में सिद्धार्थ ने मायावती को परम आदरणीय बहन जी कहकर संबोधित करते हुए लिखा कि उनके लिए मायावती का आदेश दुनिया की किसी भी चीज से बढ़कर है. रिश्ते-नाते और परिवार भी उनके आदेश के आगे छोटे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 35 वर्षों से वे बीएसपी तथा मान्यवर कांशीराम और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहे हैं. मायावती की वजह से ही वे विधान परिषद और राज्यसभा के सदस्य बने तथा पार्टी परिवार का हिस्सा माने गए.
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अशोक सिद्धार्थ ने भगवान बुद्ध और कांशीराम की कसम खाते हुए कहा कि उन्होंने कभी पार्टी या मायावती के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया. आकाश आनंद से मुलाकात भी पिछले कई महीनों में केवल उन राज्यों के कार्यक्रमों के दौरान हुई, जिनकी जिम्मेदारी उन्हें दी गई थी. पार्टी के कुछ साथियों द्वारा लगाए गए आरोप कि वे पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं या आकाश आनंद को गुमराह कर रहे हैं, पूरी तरह झूठे हैं. ये उनके राजनीतिक विरोधियों की साजिश है.
मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे
अशोक सिद्धार्थ ने मायावती से हाथ जोड़कर अपील की कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की संभावित वापसी से न जोड़ा जाए. आकाश आनंद उनके दामाद से पहले मायावती के भतीजे और आनंद भाईसाहब के बेटे हैं. उनके अंदर मायावती का खून बहता है और उन्होंने दो दशक उनकी छत्रछाया में बिताए हैं. एक मामूली कार्यकर्ता उन्हें गुमराह नहीं कर सकता. आकाश को जिम्मेदारी देना या न देना पूरी तरह मायावती का फैसला है. उन्होंने आगे लिखा कि अगर आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहा हूं. मेरा जीवन आपका ऋणी है. संन्यास तो बहुत छोटी चीज है. अगर कभी जान भी देनी पड़े तो वह मेरे लिए फख्र की बात होगी.



