असम विधानसभा चुनाव में रोमांचक मुकाबले के बाद अब नतीजों पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं. राज्य में एनडीए और कांग्रेस गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली है. इस चुनाव में असली लड़ाई दो बड़े नेता, बीजेपी के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस के गौरव गोगोई के बीच है. बात करें असम में हाई प्रोफ़ाइल सीट जालुकबारी की तो यहां सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की एकतरफा बढ़त जारी है. इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है और हिमंत बिस्वा सरमा यहां से 25 साल से विधायक हैं, लेकिन इस बार नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.

बता दें कि, राज्य की कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान हुआ था. फिलहाल असम की 72 सीटों पर रुझान या गए हैं. इनमें से 60 सीटों पर बीजेपी आगे दिखाई दे रही है. वहीं 12 सीटों पर कांग्रेस आगे दिख रही है.

बंपर हुआ था मतदान

बता दें कि, असम की जनता ने लोकतंत्र के इस पर्व में जबरदस्त उत्साह दिखाया और 85 प्रतिशत से अधिक वोटिंग दर्ज की गई. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में लगभग 82 प्रतिशत मतदान हुआ था. भारी मतदान के इन आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं और अब सबकी निगाहें चुनावी नतीजों पर टिकी हैं.

सत्ता का ‘मैजिक नंबर’, 64 सीटों की जंग

आपको बता दें कि असम की सत्ता पर काबिज होने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 64 है. असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं. नियम के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए सदन में बहुमत सिद्ध करना होता है. बहुमत के लिए कुल सीटों के आधे से कम से कम एक अधिक सीट की जरूरत होती है.

यानी, जिस भी दल या गठबंधन के पास 64 या उससे अधिक विधायक होंगे, वह राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है. यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो इसे त्रिशंकु विधानसभा कहा जाता है, जहां चुनाव के बाद गठबंधन की भूमिका अहम हो जाती है.

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