Dharm Desk: भगवान शिव का नाम लेते ही मन में उनकी जटाओं, त्रिशूल और ध्यानमग्न स्वरूप की छवि ही सामने बनती है, लेकिन क्या आपने कभी महादेव को सेठ और माता पार्वती को सेठानी के रूप में विराजमान देखा है? एक ऐसा ही अनोखा धार्मिक स्वरूप उत्तर प्रदेश के बटेश्वर धाम में देखने को मिलता है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती सामान्य शिव-पार्वती स्वरूप से अलग एक विशेष मुद्रा में विराजमान हैंl यही वहज है कि सावन में इस मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ अत्यधिक बढ़ जाती है।
पालथी मार मुद्रा में बैठे हैं शिव-पार्वती
यहां सेठ-सेठानी बनकर विराजते हैं शिव-पार्वती
बटेश्वर के गौरीशंकर मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरूप बेहद अलग दिखाई देता है। दोनों को सेठ-सेठानी की मुद्रा में पालथी मारकर बैठे हुए दर्शाया गया है। भगवान शिव की बड़ी आंखें और लंबी मूंछें उनके इस स्वरूप को और भी विशिष्ट बना देती है। माता पार्वती भी उनके साथ सेठानी के रूप में विराजमान हैं।

101 मंदिरों की श्रृंखला बनी हुई है
शिव-पार्वती के इस स्वरूप के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा भी मौजूद है। मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालु इस अनोखे रूप के दर्शन कर भगवान शिव और माता पार्वती से सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते है, बटेश्वर धाम की विशेषता केवल शिव-पार्वती का यह अनोखा स्वरूप ही नहीं है। यमुना के किनारे यहां 101 मंदिरों की श्रृंखला बनी हुई है। मंदिरों के शिखर और यमुना का पवित्र तट मिलकर पूरे धाम को एक अगल ही धार्मिक स्वरूप प्रदान करते हैं। आगरा जिला प्रशासन भी बटेश्वर को भगवान शिव यानी बटेश्वरनाथ महादेव को समर्पित 101 मंदिरों की श्रृंखला वाला प्रमुख धार्मिक स्थल बताता है।
सावन माह में शिव भक्तों की भीड़
इस समय सावन का महीना चल रहा है ऐसे में शिव भक्तों की भीड़ यहां बहुत अधिक मात्रा में देखने को मिलती है इसके अलावा महाशिवरात्रि, वार्षिक शिवरात्रि, के साथ भगवान शिव के प्रत्येक व्रत त्योहार पर भी यहां बहुत अधिक भीड़ रहती है। भक्त यमुना तट पर पहुंचकर स्नान करते हैं और फिर बाबा बटेश्वरनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।

बटेश्वर धाम यमुना के पावन तट पर बसा है
अब बात करते हैं, इस अनोखे शिव धाम की। ये बटेश्वर उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में यमुना नदी के किनारे स्थित है। आगरा शहर से इसकी दूरी करीब 70 किमी। है। आगरा से फतेहाबाद-बाह मार्ग से यहां पहुंचा जा सकता है । मंदिरों का यह समूह यमुना के एक मनोहारी मोड़ पर स्थित है।यानी एक ओर पावन यमुना का तट, दूसरी ओर भगवान शिव को समर्पित मंदिरों की श्रृंखला और इनके बीच सेठ-सेठानी के रूप में विराजमान शिव-पार्वती का अनोखा स्वरूप। यही बटेश्वर धाम को अपनी तरह का विशेष धार्मिक स्थल बनाता है।
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