आजमगढ़. समाजवादी पार्टी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ में सपा के एक एमएलसी के बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. शिक्षक एमएलसी और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर आयोजित पार्टी की बैठक में एमएलसी लालबिहारी यादव ने ऐसा बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रत्याशी को नहीं देखना है, बल्कि नेतृत्व के निर्देश पर वोट देना है.
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‘अखिलेश कुत्ते के गले में घंटी बांध दें तो भी वोट देंगे’
बैठक को संबोधित करते हुए लालबिहारी यादव ने कहा, “हमें प्रत्याशी को नहीं देखना है. अगर अखिलेश यादव कुत्ते के गले में घंटी बांध दें तो हमें उसको भी वोट देकर जीत दिलाना है.” एमएलसी के इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक बहस छिड़ गई है. समर्थक इसे पार्टी नेतृत्व के प्रति निष्ठा बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे मतदाताओं का अपमान करार दे रहा है.
शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर हो रही थी बैठक
बताया जा रहा है कि 30 अगस्त को आगामी शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर शिक्षकों को पार्टी के पक्ष में लामबंद करने के लिए संगोष्ठी आयोजित की गई थी. बैठक में आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव समेत जिले के कई सपा विधायक और पार्टी के नेता मौजूद थे. इसी दौरान मंच से संबोधित करते हुए लालबिहारी यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े रहने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि सभी का हित पार्टी और नेतृत्व के साथ खड़े रहने में है.
वीडियो वायरल होते ही विपक्ष ने घेरा
एमएलसी के बयान का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने सपा पर हमला बोल दिया. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी मतदाताओं को बंधुआ मजदूर समझती है और मानती है कि पार्टी किसी को भी प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतार देगी तो कार्यकर्ता और मतदाता उसे वोट दे देंगे. भाजपा का कहना है कि अब समय बदल चुका है और मतदाता अपने हित को समझता है. पार्टी नेताओं ने सपा के बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के सम्मान के खिलाफ बताया.
सपा में निष्ठा, विपक्ष के लिए बना हथियार
लालबिहारी यादव के बयान को लेकर सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं. सपा समर्थक इसे अखिलेश यादव के नेतृत्व में भरोसे और संगठन के प्रति निष्ठा के तौर पर देख रहे हैं. वहीं विपक्ष इसे ‘नेता जो कहें, वही सही’ वाली राजनीति का उदाहरण बता रहा है.
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आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. ऐसे में चुनावी तैयारियों के बीच सामने आया यह बयान पार्टी के लिए फायदे से ज्यादा विपक्ष को हमला करने का मौका देता नजर आ रहा है. अब देखना होगा कि सपा नेतृत्व इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देता है और आने वाले चुनाव में भाजपा इसे कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना पाती है.


