देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में होने वाली ‘कच्चा जल पूजा’ की अनोखी परंपरा देशभर में प्रसिद्ध है। जानिए इस विशेष पूजा का महत्व, धार्मिक मान्यता और चरणामृत से जुड़ी खास बातें।

देवघर। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ धाम अपनी अनूठी पूजा-पद्धति और धार्मिक परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां की ‘कच्चा जल पूजा’ ऐसी प्राचीन परंपरा है, जो अन्य ज्योतिर्लिंगों से इसे अलग बनाती है। बाबा बैद्यनाथ को ‘मनोकामना बैद्यनाथ’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है।

मंदिर का पट खुलते ही शुरू होती है कच्चा जल पूजा

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में प्रतिदिन सुबह मंदिर का पट खुलते ही कच्चा जल पूजा की शुरुआत होती है। यह मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। इस पूजा में केवल स्थानीय पुरोहित समाज के महिला, पुरुष और बच्चे ही भाग लेते हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव का केवल शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है। लगभग 20 से 30 मिनट तक चलने वाली इस पूजा में वैदिक मंत्रोच्चार और शिवभक्ति से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठता है।

चरणामृत के रूप में ग्रहण किया जाता है जल

पूजा के बाद बाबा पर अर्पित जल को श्रद्धालु महाप्रसाद स्वरूप चरणामृत के रूप में ग्रहण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह चरणामृत वर्षों तक सुरक्षित रहता है। इसमें न दुर्गंध आती है और न ही यह खराब होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इसके सेवन से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और व्यक्ति को निरोग एवं सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।

देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

धार्मिक आस्था, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट पूजा-पद्धति के कारण बाबा बैद्यनाथ धाम देश के प्रमुख शिवधामों में विशेष स्थान रखता है। यही वजह है कि यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। सावन और राजकीय श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है।