अहमदाबाद के 25 वरिष्ठजनों का दल 65 वर्ष से अधिक उम्र के बावजूद ऋषिकेश से पैदल बदरीनाथ धाम की यात्रा पर निकला है. दल ने नौ दिनों में 160 किमी की दूरी तय कर कर्णप्रयाग पहुंचने के बाद बदरीनाथ के लिए प्रस्थान किया.

चमोली. अहमदाबाद से चारधाम यात्रा पर निकले 25 वरिष्ठजनों का दल अपनी उम्र की परवाह किए बिना पैदल बदरीनाथ धाम की ओर बढ़ रहा है. दल में शामिल सभी यात्रियों की उम्र 65 वर्ष से अधिक है और उन्होंने ऋषिकेश से पैदल यात्रा शुरू की है.

रविवार सुबह करीब 9 बजे दल कर्णप्रयाग पहुंचा. यहां सदस्यों ने अलकनंदा और पिंडर नदियों के संगम में आस्था की डुबकी लगाई. इसके बाद शिवालय में जलाभिषेक किया और मां उमा मंदिर में दर्शन किए.

19 दिन पहले बनी योजना

दल के सदस्यों जयकृष्ण पटेल, गोविंद पटेल, कमलेश और विभु भरवाड़ ने बताया कि करीब 19 दिन पहले अहमदाबाद में चारधाम यात्रा की योजना बनाई गई थी. इसके बाद दल ने करीब 1,200 किलोमीटर का सफर तय किया और 14 अगस्त को रेल मार्ग से ऋषिकेश पहुंचा.

ऋषिकेश पहुंचने के बाद सभी ने गंगा आरती में हिस्सा लिया. इसके बाद पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार पैदल यात्रा शुरू की गई. यात्रा को यादगार बनाने के लिए प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार पांच से 10 किलोमीटर पैदल चलने का निर्णय लिया गया.

नौ दिन में 160 किमी सफर

दल ने ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 160 किलोमीटर की दूरी नौ दिनों में पूरी की. इस दौरान श्रद्धालुओं ने देवप्रयाग संगम, धारी देवी मंदिर और रुद्रप्रयाग संगम पर स्नान-ध्यान किया और आगे की यात्रा जारी रखी.

रविवार को कर्णप्रयाग पहुंचने के बाद दल के सदस्यों ने बताया कि उम्र के इस पड़ाव में एक-दूसरे की हौसला अफजाई ही उनकी ताकत बनी हुई है. उनका कहना है कि गुजरात में भी कई धार्मिक स्थल हैं, लेकिन उत्तराखंड आकर मिलने वाली शांति और सुकून उनके लिए अविस्मरणीय है. हिमालय की वादियां भी उन्हें आकर्षित कर रही हैं.

बदरीनाथ तक पैदल जाने का संकल्प

वरिष्ठ श्रद्धालुओं ने कहा कि उम्र की इस दहलीज पर कब भगवान की शरण में जाना पड़े, इसका पता नहीं. इसी सोच के साथ उन्होंने पैदल बदरीनाथ धाम तक जाने का संकल्प लिया है. उनका कहना है कि श्रद्धालु पहले भी पैदल बदरीनाथ दर्शन के लिए जाते रहे हैं और यह उसी परंपरा को जीवित रखने की एक कोशिश है.

दल में शामिल कुछ श्रद्धालु चौथी बार चारधाम यात्रा पर आए हैं, जबकि कुछ पहली बार यात्रा कर रहे हैं. थकान दूर करने के लिए वे बीच-बीच में घर पर फोन करते हैं और इंटरनेट मीडिया पर लाइव होकर अपने स्वजन के साथ यात्रा की पल-पल की जानकारी भी साझा कर रहे हैं.

कर्णप्रयाग से दल नंदप्रयाग होते हुए बदरीनाथ धाम की ओर रवाना हो गया है.