बहादुरगढ़। हरियाणा के झज्जर जिले स्थित बहादुरगढ़ में पिछले पखवाड़े से मांगों को लेकर धरना दे रहे सफाई कर्मचारियों और स्थानीय विधायक राजेश जून के बीच शनिवार को सियासी घटनाक्रम अचानक बदल गया। शुक्रवार को अपने आवास पर तीखी नोकझोंक के बाद शनिवार को विधायक खुद सफाई कर्मचारियों के धरना स्थल पर पहुंचे, उन्हें गले लगाया और मांगों का ज्ञापन स्वीकार किया। शुक्रवार की तल्खी के बाद शनिवार को विधायक के इस बदले रवैये की चर्चा अब पूरे क्षेत्र की राजनीति में हो रही है।
शुक्रवार को हुई थी बहस, बिना ज्ञापन दिए लौटे थे कर्मचारी
मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे सफाई कर्मचारी शुक्रवार को अपना ज्ञापन सौंपने विधायक राजेश जून के आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान विधायक और कर्मचारी नेताओं के बीच बहस हो गई, जिसमें कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विधायक ने नेता के हाथ से माइक छीन लिया था। विधायक ने हड़ताल के कारण शहर में सफाई व्यवस्था बिगड़ने और लोगों को हो रही परेशानी पर नाराजगी जताई थी, जिसके बाद कर्मचारी बिना ज्ञापन दिए वापस लौट गए थे।
पुतला फूंकने के ऐलान के बाद बदला घटनाक्रम
शुक्रवार की घटना के विरोध में सफाई कर्मचारियों ने शनिवार को बहादुरगढ़, झज्जर और बेरी में विधायक का पुतला फूंकने का ऐलान कर दिया था। इस ऐलान के बाद शनिवार को विधायक राजेश जून स्वयं कर्मचारियों के धरना स्थल पर पहुंचे। वहां उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत की और शुक्रवार के रुख के विपरीत नरम रवैया अपनाते हुए कर्मचारियों को गले लगाया और उनसे ज्ञापन लिया।
मांगों के समाधान पर टिकी कर्मचारियों की नजर
धरना स्थल पर विधायक ने सफाई कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखा जाएगा और समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। शुक्रवार को आवास से बिना ज्ञापन दिए लौटने और शनिवार को विधायक द्वारा खुद धरना स्थल आकर ज्ञापन लेने की घटना ने स्थानीय राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि यह आश्वासन उनकी मांगों को पूरा कराने में कितना मददगार साबित होता है
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