Automobile Desk – भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में एक बड़ा इन्वेस्टमेंट डील आने वाला है। अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म बैन कैपिटल (Bain Capital), जेबीएम ऑटो (JBM Auto) के ईवी बिजनेस में लगभग 300 मिलियन डॉलर (यानी करीब ₹2,850 करोड़) के निवेश पर बातचीत कर रही है। डील फाइनल होने पर बैन कैपिटल को जेबीएम की ईवी यूनिट में एक बड़ी माइनॉरिटी हिस्सेदारी (माइनॉरिटी स्टेक) मिल सकती है।

मार्केट सोर्सेज के मुताबिक, दोनों कंपनियों के बीच वैल्यूएशन, हिस्सेदारी और डील के ढांचे को लेकर चर्चा चल रही है। बैन कैपिटल इस वेंचर में जॉइंट कंट्रोल लेने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। यह फंडिंग जेबीएम ऑटो को अपने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्शन क्षमता को बढ़ाने में काफी मदद करेगी। कंपनी पहले मुख्य रूप से ऑटो कंपोनेंट्स पर फोकस्ड थी, लेकिन अब वह तेजी से बढ़ते ईवी बस मार्केट में अपना बेस मजबूत कर रही है।
जेबीएम ऑटो फिलहाल देश के इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट में सबसे आगे चल रही है। टार्मैक इलेक्ट्रिक बस मार्केट में कंपनी का शेयर लगभग 79% है, जबकि इंटरसिटी इलेक्ट्रिक लग्जरी कोच स्पेस में 50% से ज्यादा मार्केट शेयर है। दिल्ली-एनसीआर में स्थित जेबीएम की इंटीग्रेटेड ईवी बस फैक्ट्री चीन के बाहर सबसे बड़ी यूनिट्स में गिनी जाती है। साल 2026 की पहली छमाही में जेबीएम ग्रुप की 804 इलेक्ट्रिक बसें रजिस्टर हुई हैं।
फाइनेंशियल आंकड़ों के हिसाब से, चालू वित्त वर्ष में जेबीएम ग्रुप ₹7,000 से ₹7,500 करोड़ के रेवेन्यू टारगेट पर काम कर रहा है। इसमें अकेला ईवी डिवीजन करीब 45% योगदान दे सकता है। वित्त वर्ष 2026 में जेबीएम के ईवी आर्म का रेवेन्यू 16% बढ़कर ₹2,307 करोड़ पहुंच गया, जो कंपनी की कुल सेल्स का 38% था। मार्च तिमाही में इस सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.4% बढ़कर ₹831 करोड़ और नेट प्रॉफिट 44.5% बढ़कर ₹106 करोड़ हो गया। कंपनी के पास अगले 30 महीनों के लिए 9,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों का सॉलिड ऑर्डर बैकलॉग मौजूद है।
जेबीएम ऑटो ने बस मैन्युफैक्चरिंग तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि वह पूरा ईवी इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। कंपनी का बस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ‘जेबीएम इलेक्ट्रिक व्हीकल्स’ के तहत आता है, जिसकी सालाना क्षमता 20,000 बसों की है। इस यूनिट में जेबीएम ऑटो की 85% हिस्सेदारी है। इसके अलावा, बैटरी पैकेजिंग और कंपोनेंट्स बिजनेस ‘जेबीएम ग्रीन एनर्जी’ के जरिए मैनेज होता है, जिसकी सालाना बैटरी क्षमता 6 GWh तक पहुंच चुकी है। इस बैटरी क्षमता का इस्तेमाल ई-बसों के अलावा टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स, एलसीवी और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में भी किया जा रहा है।
ग्लोबल मार्केट्स में भी जेबीएम तेजी से अपना विस्तार कर रहा है। यूरोप, खाड़ी देशों, अफ्रीका, सिंगापुर और एशिया-पैसिफिक मार्केट्स में कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है। यूरोप की जरूरतों को पूरा करने के लिए फ्रैंकफर्ट में रीजनल हेडक्वार्टर बनाया गया है और लेफ्ट-हैंड ड्राइव इलेक्ट्रिक बसें तैयार की गई हैं। फ्लीट एनालिटिक्स और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए जेबीएम ने हिताची जीरोकार्बन (Hitachi ZeroCarbon) जैसी ग्लोबल टेक फर्म्स के साथ रणनीतिक साझेदारी भी की है।

