नीरज काकोटिया, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला जिलों में फैले कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार रेंज में लगभग 45 वर्षों बाद एशियाई वाइल्ड बफेलो की वापसी हुई। इस ऐतिहासिक पलो के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं साक्षी बने और सूपखार पहुंचकर असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए 4 वाइल्ड बफेलो 3 मादा और 1 नर को सॉफ्ट रिलीज के तहत विशेष बाड़े में छोड़ेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से मध्य प्रदेश और असम वन विभाग ने मिलकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की है। इसके तहत काजीरंगा से कुल 50 एशियाई जंगली जल भैंसों (बुबालस आर्नी) को कान्हा टाइगर रिजर्व में पुनर्स्थापित किया गया। बता दें की प्रथम चरण में मानसून से पहले 8 भैंसों को लाने की योजना है।
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इस परियोजना का उद्देश्य इस विशाल शाकाहारी प्रजाति को मध्य भारत के उसके ऐतिहासिक निवास क्षेत्र में फिर से स्थापित करना है। जहां यह एक सदी से अधिक समय से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी थी। साथ ही इनके प्राकृतिक चरने के व्यवहार से कान्हा के घास के मैदानों में लंबी घास की प्रजातियों का प्रबंधन बेहतर होगा और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए 4 जंगली भैंसों (3 मादा, 1 नर) को विशेष बाड़े में सॉफ्ट रिलीज़ किया।
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यह कदम मध्यप्रदेश और असम के बीच समन्वय और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि यह केवल एक पुनर्स्थापन नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। लंबे समय से विलुप्त जंगली भैंसा अब अपने ऐतिहासिक आवास में लौट रहा है, जो प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

