अरविन्द मिश्रा, बलौदाबाजार। रक्षाबंधन पर्व से पहले बलौदाबाजार की स्कूली छात्राओं ने देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त करने की अनूठी पहल की है। छात्राओं ने अपने हाथों से पर्यावरण अनुकूल राखियां तैयार की हैं, जिन्हें सैनिक भाइयों को भेजा जाएगा। इन राखियों को धान, चावल, मौली धागा और ऊन जैसी प्राकृतिक सामग्री से बनाया गया है।
देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए तैयार की विशेष राखियां

राखियां तैयार करने वाली छात्राओं का कहना है कि रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व है। जिस प्रकार एक भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है, उसी तरह देश के सैनिक पूरे राष्ट्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए उन्होंने सैनिक भाइयों के लिए अपने हाथों से राखियां बनाकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं भेजने का निर्णय लिया।

धान, चावल और मौली धागे से बनाया पर्यावरण मित्र रक्षासूत्र
छात्राओं ने राखियों के निर्माण में पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा है। इसके लिए धान, चावल, मौली धागा और ऊन जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया गया है। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य रक्षाबंधन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी है।

राखी के साथ छत्तीसगढ़ की मिट्टी, रोली और शुभकामना पत्र भी भेजेंगी
छात्राओं ने बताया कि सैनिक भाइयों के लिए केवल राखी ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, रोली और शुभकामना संदेश भी भेजे जाएंगे। उनका मानना है कि प्रदेश की मिट्टी की खुशबू सैनिकों को अपनेपन का एहसास कराएगी। रोली और मिट्टी से वे विजय तिलक कर सकेंगे। इसके साथ छात्राओं ने अपने हाथों से पत्र भी लिखे हैं, जिनमें सैनिकों के प्रति सम्मान, आभार और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं व्यक्त की गई हैं।
‘आज हम सुरक्षित हैं तो सैनिक भाइयों की वजह से’

राखी तैयार करने वाली छात्राओं ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक हर परिस्थिति में देशवासियों की सुरक्षा के लिए डटे रहते हैं। आज पूरा देश सुरक्षित है तो इसका श्रेय हमारे वीर जवानों को जाता है। इसी भावना के साथ वे सैनिक भाइयों को राखी भेज रही हैं, ताकि उन्हें यह एहसास हो सके कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है और उनकी कुर्बानियों का सम्मान करता है।
प्राचार्य बोलीं- देशभक्ति और पर्यावरण संरक्षण की सीख देने का प्रयास

विद्यालय की प्राचार्य वंदना तिवारी ने बताया कि रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व है। इसी भावना को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से छात्राओं ने अपने हाथों से सैनिक भाइयों के लिए राखियां तैयार की हैं। इन राखियों के निर्माण में धान, चावल, मौली धागा और ऊन जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके।

उन्होंने बताया कि सैनिकों का अपनी मातृभूमि और छत्तीसगढ़ से भावनात्मक जुड़ाव बना रहे, इसलिए राखियों के साथ प्रदेश की मिट्टी, रोली और छात्राओं के शुभकामना संदेश भी भेजे जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में देशभक्ति, सैनिकों के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना है। विद्यालय की इस पहल की स्थानीय स्तर पर भी सराहना हो रही है।
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