बांग्लादेश हाईकोर्ट ने रविवार को एक अहम फैसला सुनाया है. बांग्लादेश हाई कोर्ट ने रविवार को जेल में बंद हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को आपराधिक मामलों में जमानत दे दी है. हालांकि, चार अन्य मामले लंबित होने के कारण उनकी तत्काल रिहाई नहीं होगी. हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को नवंबर 2024 में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. दो मामलों में दाखिल जमानत अर्जियों पर सुनवाई के लिए 16 अगस्त की तारीख तय है.
चिन्मय कृष्ण दास के वकील अपूर्बा कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि हत्या के प्रयास, तोड़फोड़ और लोक अधिकारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के आरोपों से जुड़े दो मामलों में पीठ ने उनकी जमानत याचिकाओं को मंजूरी दे दी है.
चिन्मय कृष्ण दास एक हिंदू संत हैं. उन्हें नवंबर 2024 में राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान से जुड़े देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उनकी इस गिरफ़्तारी के बाद बांग्लादेश में विरोध-प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव हुए. जिसके बाद कृष्ण दास के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश और तोड़फोड़ समेत कई अन्य मामलों में भी केस दर्ज किए गए.
वह पहले इस्कॉन के नेता और बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोत नाम के हिंदू समूह के प्रवक्ता रह चुके हैं. यह बांग्लादेश में हिंदू संगठनों का एक बड़ा मंच है. यह संगठन मुख्य रूप से बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए आवाज उठाता है.
चिन्मय दास के खिलाफ दर्ज मामले फिलहाल अदालतों में अलग-अलग चरणों में हैं. उनके वकील लंबे समय से जमानत की मांग कर रहे हैं.
सबसे गंभीर मामलों में से एक मामला कनिष्ठ सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या से संबंधित है. चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान एक सरकारी वकील की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी.
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