Bank Vs NBFC Loan : जब पैसों की जरूरत होती है, तो लोग आम तौर पर लोन के लिए बैंकों का रुख करते हैं. इसके अलावा लोग अपनी अलग-अलग तरह की खास फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने के लिए भी बैंकों से लोन लेते हैं.

जहां कुछ लोग लोन लेने के लिए बैंकों पर निर्भर रहते हैं, वहीं कुछ लोग नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) से उधार लेना पसंद करते हैं. लेकिन, बैंक और NBFC से उधार लेने में असल में क्या फर्क है. कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है? आज हम इसी विषय पर बात करेंगे.

NBFCs कई तरह की फाइनेंशियल सेवाएं देती हैं, जिनमें पर्सनल लोन, ऑटो लोन और बिजनेस लोन शामिल हैं. हालांकि बैंक और NBFCs, दोनों ही लोन देने का काम करते हैं, लेकिन उनके काम करने का तरीका काफी अलग होता है. इसलिए, इन दोनों में से किसी से भी लोन के लिए अप्लाई करने से पहले, इन दोनों तरह के फाइनेंशियल संस्थानों के बीच के फर्क को समझना बहुत जरूरी है.

बैंक और NBFCs कैसे काम करते हैं?

बैंक पूरी तरह से लाइसेंस्ड और सख्त नियमों के तहत काम करने वाले फाइनेंशियल संस्थान होते हैं. वे ग्राहकों से जमा स्वीकार करते हैं और इन्हीं पैसों का इस्तेमाल लोन और दूसरी फाइनेंशियल सेवाएँ देने के लिए करते हैं. इसी वजह से, बैंकों को सख़्त नियमों और कड़ी निगरानी का पालन करना पड़ता है.

इसके उलट, हालांकि NBFCs भी ग्राहकों को लोन देती हैं, लेकिन उन्हें पारंपरिक बैंकों की तरह “डिमांड डिपॉजिट” (माँग पर जमा) स्वीकार करने का अधिकार नहीं होता. दूसरे शब्दों में कहें तो, वे सीधे तौर पर सेविंग्स अकाउंट जैसी सुविधाएँ नहीं देतीं. नतीजतन, NBFCs को नियंत्रित करने वाले नियम-कानून थोड़े कम सख़्त होते हैं, जिससे उन्हें कई मामलों में ज्यादा आजादी से काम करने का मौका मिलता है.

लोन की मंजूरी और पात्रता, बैंक बनाम NBFCs

लोन देने से पहले, बैंक ग्राहक के दस्तावेजो इनकम, क्रेडिट स्कोर और कुल फाइनेंशियल स्थिति की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करते हैं. इसलिए, बैंक से लोन लेने के लिए एक मजबूत क्रेडिट हिस्ट्री और अच्छा फाइनेंशियल रिकॉर्ड होना जरूरी माना जाता है.

इसके विपरीत, NBFCs अक्सर ऐसे लोगों को भी लोन देने के लिए तैयार रहती हैं, जिन्हें पारंपरिक बैंक शायद लोन देने में हिचकिचाएं, जैसे कि पहली बार लोन लेने वाले लोग, अपना बिजनेस करने वाले लोग, और कम क्रेडिट हिस्ट्री वाले ग्राहक. इसी वजह से, जो लोग जल्दी और बिना किसी परेशानी के फाइनेंशियल मदद चाहते हैं, उनके लिए NBFCs एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं.

ब्याज दरें और दूसरे शुल्क: बैंक बनाम NBFCs

बैंक आम तौर पर कम ब्याज दरों पर लोन देते हैं, क्योंकि वे अपने ग्राहकों से जमा किए गए पैसों के आधार पर ही अपनी पूंजी जुटाते हैं. नतीजतन, उनके फंड्स की ऑपरेशनल लागत (operational cost) अपेक्षाकृत कम होती है. इसके विपरीत, NBFCs को वैकल्पिक स्रोतों से फंड्स जुटाने पड़ते हैं.

NBFCs अक्सर रीपेमेंट के ऐसे विकल्प देते हैं, जो ज्यादा लचीले होते हैं और उनके ग्राहकों की खास ज़रूरतों के हिसाब से बनाए गए होते हैं. वे छोटे व्यवसायों, फ्रीलांसरों और गैर-पारंपरिक या बदलती आय वाले व्यक्तियों के लिए डिजाइन की गई खास योजनाएं भी शुरू करते हैं.

दूसरी ओर बैंक न केवल लोन देते हैं, बल्कि कई अन्य वित्तीय सेवाएं भी देते हैं. जैसे बचत खाते, क्रेडिट कार्ड, निवेश उत्पाद और बीमा सेवाएं. इससे ग्राहकों को एक ही जगह पर कई वित्तीय सुविधाएं मिल जाती हैं, जिससे बैंक एक ज्यादा व्यापक और भरोसेमंद विकल्प लगते हैं.