Bastar News Update : बस्तर. बस्तर अब सिर्फ नक्सल प्रभावित क्षेत्र नहीं, बल्कि रणनीतिक बदलाव की प्रयोगशाला बनता दिख रहा है. 19 मई को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का दौरा इसी बदलाव को दिशा देने वाला माना जा रहा है. जगदलपुर में होने वाली अंतर-राज्यीय बैठक में सुरक्षा से ज्यादा फोकस विकास और समन्वय पर रहेगा. इस बार बैठक बस्तर में होना ही संकेत है कि नीति अब जमीनी हकीकत पर आधारित होगी. बैठक में कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे, जिससे सीमावर्ती तालमेल मजबूत होगा. 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त’ लक्ष्य को लेकर ठोस रोडमैप तैयार होगा. सुकमा जैसे इलाकों में ग्रामीण बस योजना ने जमीनी बदलाव की नींव रख दी है. पहले जहां 10 किमी पैदल चलना मजबूरी थी, अब सड़क और बस पहुंच रही है. सुरक्षा के साथ-साथ सुविधाओं का विस्तार ही इस नई रणनीति का केंद्र है. प्रशासन ने सभी विभागों से प्रगति रिपोर्ट तलब कर तैयारी तेज कर दी है. यह दौरा केवल समीक्षा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला मंच बनेगा. बस्तर अब संघर्ष की नहीं, संभावनाओं की कहानी लिखने की ओर बढ़ रहा है.
गांव की शादी में थिरके विदेशी मेहमान
फरसगांव. छत्तीसगढ़ के गांव की शादी उस वक्त और खास बन गई जब उसमें विदेशी मेहामानों की एंट्री हो गई. बेड़मा गांव में नायक परिवार में शादी का माहौल था. इस दौरान कुछ विदेशी पर्यटक भी वहां पहुंच गए. फिर क्या था, खुशियों में वह भी शामिल होकर थिरकने लगे. विदेशी मेहमानों ने यह यादगार पल इपने मोबाइल में कैद किया. दरअसल, बुधवार को जगदलपुर की ओर जा रहे – कुछ विदेशी पर्यटक कार्यक्रम स्थल के पास रुक गए. पारंपरिक वेशभूषा में सजे दूल्हा-दुल्हन और ग्रामीण परिवेश की रंगत देखकर वे खासे उत्साहित हो उठे. कुछ ही देर में माहौल और भी दिलचस्प हो गया, जब विदेशी मेहमान खुद को रोक नहीं पाए और डीजे की धुन पर रंग-गुलाल के साथ झूमने लगे. उनका यह उत्साह और देसी अंदाज वहां मौजूद ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया. देखते ही देखते पूरा पंडाल तालियों और हंसी-खुशी से गूंज उठा.
टेंडर से पहले तय ठेकेदार? पालिका की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा नगर पालिका में विकास कार्यों से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है. टेंडर खुलने से पहले ही कथित ठेकेदारों की सूची सोशल मीडिया में वायरल हो गई. इस सूची में कामों का बंटवारा पहले से तय होने का दावा किया जा रहा है. करीब डेढ़ करोड़ के 15 निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सीसी सड़क, नाली और पुलिया जैसे जरूरी काम भी अब शक के घेरे में हैं. अन्य ठेकेदारों में नाराजगी है, उनका आरोप है कि प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बन गई है. सूची कलेक्टर तक पहुंचने की चर्चा से मामला और गंभीर हो गया है. अब निगाहें इस पर हैं कि टेंडर निरस्त होगा या प्रक्रिया जारी रहेगी. यदि सूची के अनुसार काम दिए गए तो पारदर्शिता पर सवाल और गहराएंगे. विभागीय स्तर पर कमीशनखोरी के आरोप भी सामने आ रहे हैं. हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन माहौल अविश्वास से भरा है. सीएमओ ने प्रक्रिया को नियमसम्मत बताया, लेकिन सवाल अभी भी कायम हैं. अब यह मामला प्रशासनिक जांच और जवाबदेही की कसौटी बनता जा रहा है.
फार्मर आईडी से खाद, कालाबाजारी पर प्रशासन का सख्त वार
बस्तर. बस्तर में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. अब बिना ‘फार्मर आईडी’ के किसी भी किसान को खाद नहीं मिलेगी. खाद वितरण अब खेत के रकबे और फसल के आधार पर तय होगा. पहले मनमानी खरीद से बाजार में असंतुलन और कालाबाजारी बढ़ रही थी. जिले में 95% किसानों की आईडी तैयार हो चुकी है. निजी दुकानों को भी अब इस नियम का पालन अनिवार्य कर दिया गया है. 125 निजी दुकानें और 52 समितियां इस सिस्टम के तहत काम कर रही हैं. नियम तोड़ने वालों पर सख्ती शुरू, 22 दुकानदारों पर कार्रवाई हुई है. तीन दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर प्रशासन ने साफ संदेश दिया है. खरीफ सीजन में खाद की किल्लत रोकने का यह बड़ा प्रयास माना जा रहा है. बिचौलियों में इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है. किसानों को भी समय रहते आईडी बनवाने की चेतावनी दी गई है. यह व्यवस्था पारदर्शिता और संतुलित वितरण की दिशा में अहम कदम है.
जीरो टॉलरेंस – हथियार लेकर दहशत फैलाने वाला युवक गिरफ्तार
जगदलपुर. जगदलपुर में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है. बोधघाट थाना क्षेत्र में एक युवक को बटनदार चाकू के साथ गिरफ्तार किया गया. आरोपी तिरंगा चौक के पास राहगीरों को डरा-धमका रहा था. टाउन पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी. घेराबंदी कर पुलिस ने आरोपी को मौके से ही दबोच लिया. आरोपी के पास से अवैध हथियार बरामद किया गया है. उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया. एसपी शलभ सिन्हा के नेतृत्व में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू है. शहर में चाकूबाजी और असामाजिक गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई हो रही है. चौक-चौराहों पर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है. स्थानीय लोगों ने कार्रवाई के बाद राहत महसूस की है. पुलिस ने साफ कहा हथियार दिखाकर दहशत फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. यह कार्रवाई कानून व्यवस्था पर सख्ती का स्पष्ट संदेश है.
जंगल में आग या शिकार की साजिश? वन विभाग पर उठे सवाल
दंतेवाड़ा. दंतेवाड़ा के जंगलों में लगातार आग लगने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं. भांसी और चंदेनार क्षेत्र की पहाड़ियों में हालिया आग ने बड़ा क्षेत्र प्रभावित किया. धुआं शहर तक दिखाई देने से हालात की गंभीरता साफ नजर आई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकार के लिए जानबूझकर आग लगाई जा रही है. गर्मी में वन्यजीव पानी की तलाश में बाहर आते हैं, जिससे वे आसान शिकार बनते हैं. बाघों के प्राकृतिक आवास पर खतरा मंडरा रहा है. वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि समय रहते आग बुझाने के प्रयास नहीं किए गए. लगातार घटनाओं के बावजूद ठोस रणनीति नजर नहीं आ रही है. वन्यजीवों की सुरक्षा अब बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. स्थानीय लोग जंगल संरक्षण को लेकर चिंतित हैं. यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो नुकसान और बढ़ सकता है. यह मामला पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों से जुड़ा है.
शराब बना जानलेवा विवाद, पत्नी की हत्या करने वाला पति गिरफ्तार
कोंडागांव. कोंडागांव जिले में घरेलू विवाद ने एक महिला की जान ले ली. आरोपी पति ने शराब को लेकर विवाद में पत्नी पर डंडे से हमला किया. गंभीर रूप से घायल महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई. घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था. मृतका के भाई की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में आरोपी ने गुस्से में वार करने की बात स्वीकार की. घायल महिला को पहले स्थानीय अस्पताल, फिर रायपुर रेफर किया गया था. 3 मई को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मामले में बीएनएस की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. घटना ने घरेलू हिंसा और शराब की समस्या को उजागर किया है. पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है. यह मामला समाज में बढ़ती पारिवारिक हिंसा की गंभीर तस्वीर दिखाता है.

बीमा कंपनी की लापरवाही पर शिकंजा, उपभोक्ता को मिलेगा हक
जगदलपुर. जगदलपुर में उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी पर बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने कंपनी को 6 लाख रुपये का दावा और 10 हजार मुआवजा देने का आदेश दिया. मामला बीमा दावा खारिज करने से जुड़ा था. आवेदक ने पत्नी के नाम पर बीमा कराया था, जिसकी मृत्यु हो गई थी. कंपनी ने पूर्व बीमारी छिपाने का आरोप लगाकर दावा खारिज कर दिया था. आयोग ने पाया कि ऐसा कोई प्रमाण कंपनी पेश नहीं कर सकी. निर्णय में कहा गया कि कंपनी ने गलत आधार पर दावा निरस्त किया. बीमा जारी करने से पहले मेडिकल जांच कंपनी की जिम्मेदारी होती है. लंबे समय तक दावा लंबित रखना भी गलत माना गया. आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया. यह निर्णय बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय करता है. साथ ही उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है. अब यह फैसला अन्य मामलों के लिए भी मिसाल बन सकता है.
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