Bastar News Update : नारायणपुर. नारायणपुर में आमदई माइंस के पास मंगलवार को चलती ट्रक में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई. ट्रक के केबिन में शॉर्ट सर्किट के बाद अचानक धुआं उठने लगा. चालक और हेल्पर कुछ समझ पाते, इससे पहले आग ने विकराल रूप ले लिया. दोनों ने बिना देर किए ट्रक से कूदकर अपनी जान बचाई. देखते ही देखते आग ने पूरे केबिन को अपनी चपेट में ले लिया और ट्रक धू-धूकर जलने लगा. घटना ओरछा मुख्य मार्ग पर आमदई माइंस के पास की बताई गई है. आसपास मौजूद अन्य ट्रक चालकों ने भी तत्काल सतर्कता बरती और आग को दूसरे वाहनों तक पहुंचने से रोकने में मदद की. सूचना मिलते ही एसडीओपी और टीआई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर हादसे की जानकारी जुटाई. प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट सामने आई है. ट्रक नारायणपुर निवासी जयदेव मलिक का बताया गया है, जबकि हादसे में चालक और हेल्पर सुरक्षित हैं.
परंपरा का पर्व, इस बार 1.22 करोड़ के बजट की तैयारी
जगदलपुर. बस्तर दशहरा की तैयारियों के साथ अब इसके आयोजन पर होने वाले खर्च का खाका भी सामने आ गया है. पाट जात्रा विधान पूरा होने के बाद दशहरा समिति ने आगे की व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं. कलेक्टोरेट में हुई बैठक में वर्ष 2026 के आयोजन के लिए 1 करोड़ 22 लाख 53 हजार 629 रुपए का प्रस्ताव रखा गया. पिछले साल वास्तविक खर्च करीब 1 करोड़ 11 लाख 39 हजार रुपए रहा था. यानी इस बार आयोजन का प्रस्तावित बजट करीब 11 लाख रुपए से अधिक बढ़ा है. परंपरागत रस्मों से लेकर रथ, सजावट, सामग्री और व्यवस्थाओं तक अलग-अलग मदों में राशि प्रस्तावित की गई है. बकरा-सूअर के लिए 15.40 लाख और कपड़े के लिए भी 15.40 लाख रुपए रखे गए हैं. वहीं रंगाई-पुताई, डीजल, बिजली सजावट, किराना और कुश्ती प्रतियोगिता पर भी लाखों रुपए खर्च होंगे. आयोजन के लिए फिलहाल संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग से 25 लाख और कलेक्टर कार्यालय से 50 लाख रुपए मिले हैं. इस तरह अभी 75 लाख रुपए उपलब्ध हैं, जबकि पिछले आयोजन का करीब 36.39 लाख रुपए का भुगतान लंबित बताया गया है. दशहरा समिति का कहना है कि बस्तर दशहरा धार्मिक आयोजन से अलग सदियों पुरानी जीवंत परंपरा का स्वरूप है.
स्कूल के छात्रों का सड़क पर उतरकर विरोध, जांच के भरोसे शिक्षा विभाग
कोंडागांव. माकड़ी ब्लॉक के हीरापुर हायर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार को विद्यार्थियों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. नियमित छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की. विद्यार्थी स्कूल से बाहर निकलकर सड़क पर पहुंचे और कुछ समय के लिए मार्ग भी बाधित किया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने विद्यालय की व्यवस्थाओं की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की. छात्रों ने ओपन स्कूल के नाम पर दसवीं और बारहवीं के परीक्षार्थियों से कथित तौर पर राशि लिए जाने का आरोप लगाया. परीक्षा के दौरान नकल कराए जाने के आरोप भी विद्यार्थियों की ओर से लगाए गए हैं. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी. मामले में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुखराम नेताम ने जांच कर प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को भेजने की बात कही है. जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान ने भी मामले की जांच जारी होने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र का अहित नहीं होने दिया जाएगा. अगर जांच में नकल या अन्य अनियमितता के आरोप सही पाए गए तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी.
जंगल से निकलकर शहर की दहलीज तक पहुंचा बाघ, बढ़ी निगरानी
दंतेवाड़ा.दंतेवाड़ा में करीब 20 दिन से जारी बाघ की मौजूदगी अब शहर के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है. मासोड़ी के जंगलों में हलचल के बाद अब भैरमबंद इलाके में बाघ के ताजा पंजों के निशान मिले हैं. यह इलाका दंतेवाड़ा बाईपास से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है. चंदेनार की सड़क पर रात के समय वन्यजीव जैसी आकृति की तस्वीर सामने आने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है. वन विभाग के मुताबिक बाघ पानी और भोजन की तलाश में एक इलाके से दूसरे इलाके में लगातार मूवमेंट कर सकता है. मासोड़ी से बालूद और भैरमबंद होते हुए डंकिनी नदी का कछार उसके संभावित रास्ते के रूप में देखा जा रहा है. बाघ की वास्तविक मौजूदगी की पुष्टि के लिए संभावित रास्तों पर हाईटेक कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं. वहीं ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए शाम सात बजे के बाद जंगल की ओर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. गांवों में मुनादी कराकर लोगों को रात में अकेले बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी जा रही है. मवेशियों को भी सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है. वन विभाग का कहना है कि मिले पंजों के निशान बाघ के प्रतीत हो रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिक पुष्टि के लिए कैमरा ट्रैप की तस्वीरों का इंतजार है.
विचाराधीन बंदियों को राहत दिलाने पर जोर, समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
कोंडागांव. जिला स्तर पर लंबे समय से विचाराधीन मामलों में बंद कैदियों को राहत दिलाने की दिशा में समीक्षा की गई. अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी और मॉनिटरिंग सेल की बैठक में पात्र बंदियों के मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई. ऐसे बंदियों के मामलों की समीक्षा की गई, जिन्हें लंबे समय से जमानत का लाभ मिलने के बावजूद शर्तें पूरी करने में परेशानी है. इसके अलावा उन बंदियों के मामलों पर भी ध्यान दिया गया, जो अपनी संभावित अधिकतम सजा की तुलना में पर्याप्त समय जेल में बिता चुके हैं. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने अधिकारियों को पात्र मामलों में तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए. बैठक में बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. मॉनिटरिंग सेल की बैठक में नए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने पर भी चर्चा हुई. ग्राम तोतर में मेगा ड्राइव के तहत प्रत्येक सप्ताह कैंप लगाने को लेकर भी संबंधित विभागों के साथ समन्वय पर जोर दिया गया. कैंप के जरिए ग्रामीणों तक विभिन्न विभागों की सेवाएं पहुंचाने की योजना पर चर्चा हुई. बैठक में न्यायिक, पुलिस, प्रशासन और अभियोजन से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पात्र बंदियों और ग्रामीणों से जुड़े मामलों में प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए.

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
जगदलपुर. धरमपुरा स्थित शौंडिक भवन में सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ. समापन के साथ आयोजित महाभंडारे में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या जुटी. लेकिन इस धार्मिक आयोजन की खास बात भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिखाई दी. आयोजन समिति ने पूरे कार्यक्रम को प्लास्टिक मुक्त रखने की पहल की. श्रद्धालुओं को प्रसाद प्लास्टिक या थर्माकोल की प्लेटों के बजाय केले के पत्तों पर परोसा गया. पानी के लिए डिस्पोजेबल गिलास की जगह स्टील के गिलास का इस्तेमाल किया गया. सात दिनों तक चले आयोजन में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई. वृंदावन से पहुंचे कथा व्यास अनादि महाराज ने भागवत के विभिन्न प्रसंगों से धर्म और संस्कार का संदेश दिया. हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे और पूरा परिसर भक्तिमय रहा. धार्मिक आयोजन में परंपरा के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी जोड़ने की इस पहल की श्रद्धालुओं ने सराहना की. आयोजन में शहर के विभिन्न लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
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