Bastar News Update : जगदलपुर. जगदलपुर रेलवे स्टेशन में नया लोहे का ओवरब्रिज लगभग तैयार हो गया है. 12 मीटर चौड़ा और करीब 110 मीटर लंबा यह पुल यात्रियों के लिए अहम सुविधा बनेगा. इसके जरिए प्लेटफॉर्म नंबर 2, 3, 4 और 5 तक पहुंच आसान होगी. अब यात्रियों को भीड़ और लंबा चक्कर लगाने से राहत मिलेगी. स्टेशन पर अमृत योजना के तहत बड़े पैमाने पर विकास कार्य चल रहे हैं. प्लेटफॉर्म नंबर 1 और 2 की लंबाई भी 500 मीटर से अधिक बढ़ाई गई है. इससे लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन आसान होगा. विभाग भविष्य में एस्केलेटर लगाने की तैयारी भी कर रहा है. पुराने अंडरब्रिज को दोबारा खोलने की भी चर्चा है. इससे 20 गांवों के लोगों को सीधा आवागमन मिलेगा. केके लाइन दोहरीकरण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. रेल सुविधाओं के विस्तार से बस्तर की कनेक्टिविटी मजबूत होगी.

इस बार नहीं सूखी इन्द्रावती, किसानों की सतर्कता रंग लाई
बस्तर. पिछले वर्ष गर्मी में इन्द्रावती नदी कई हिस्सों में सूख गई थी. लेकिन इस सीजन तस्वीर पूरी तरह बदली नजर आ रही है. नदी में अब भी पर्याप्त पानी बना हुआ है. किसानों ने इस बार पहले से सावधानी बरतते हुए पानी उपयोग नियंत्रित रखा. नदी किनारे मक्के का रकबा भी पिछले साल से कम हुआ है. इससे पानी का दबाव घटा और जलस्तर बेहतर बना रहा. एनीकटों से इस बार पानी नहीं छोड़ा गया. चित्रकोट जलप्रपात की धारा कम जरूर हुई, पर सूखी नहीं. नारायणपाल एनीकट के गेट बंद रहने से लाभ मिला है. पिछले वर्ष जल प्रबंधन और विवादों ने स्थिति बिगाड़ दी थी. इस बार मरम्मत और नियंत्रण से संकट टल गया. इन्द्रावती ने राहत दी तो किसानों ने भी जिम्मेदारी निभाई.
स्लरी पाइपलाइन निर्माण में तालाब टूटे, मछलीपालन को भारी नुकसान
दंतेवाड़ा. बचेली से नगरनार तक बिछाई जा रही स्लरी पाइपलाइन अब विवादों में घिर गई है. कुम्हाररास क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान किसान के पांच तालाब टूटने का मामला सामने आया है. तालाबों से करीब 10 टन मछलियां बहने और 25 लाख रुपये नुकसान का दावा किया गया है.
भीषण गर्मी में तालाबों का पानी खेतों में बह जाने से सिंचाई संकट भी खड़ा हो गया. पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई हुई. बताया गया कि जमीन अधिग्रहण का आदेश अब तक जारी नहीं हुआ है. मुआवजा तय किए बिना तालाब तोड़ना गंभीर लापरवाही बताया जा रहा है. ग्रामीणों ने इसे आजीविका पर सीधा हमला बताते हुए विरोध जताया है. गर्मी के मौसम में तालाब सुखाने पर नियमों के तहत रोक भी लागू रहती है. ऐसे में एक साथ पांच तालाब तोड़े जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पिछले साल भी पाइपलाइन गड्ढों में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई थी. अब ग्रामीण जांच, क्षतिपूर्ति और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
बीमा कंपनी पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 5 लाख चुकाने का आदेश
जगदलपुर. मेडिक्लेम विवाद में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना है. इलाज खर्च की प्रतिपूर्ति के रूप में 5 लाख रुपये देने का आदेश सुनाया गया. मानसिक पीड़ा के लिए अतिरिक्त 10 हजार रुपये देने भी निर्देशित किया गया है. परिवार ने हेल्थ पॉलिसी लेकर इलाज के बाद दावा प्रस्तुत किया था. बीमा कंपनी ने वेटिंग पीरियड का हवाला देकर दावा निरस्त कर दिया. इसके बाद पीड़ित परिवार ने आयोग की शरण ली थी.
सुनवाई के दौरान आयोग ने पॉलिसी शर्तों की विस्तृत समीक्षा की. आयोग ने कहा कि योजना व्यापक सुरक्षा देने वाली पॉलिसी थी. गलत व्याख्या कर दावा ठुकराना अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया. निर्णय से उपभोक्ताओं को राहत और कंपनियों को संदेश मिला है. अब कंपनियों को नियमों का स्पष्ट पालन करना होगा. यह फैसला बीमा दावों में पारदर्शिता की मिसाल माना जा रहा है.
तुम्बा में मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन, परंपरा बनी पहचान
बस्तर. जंगलों के बीच बसे गांव गुड़िया में परंपरागत ज्ञान नई मिसाल बन रहा है. ग्रामीण वैद्य गोंचा ने तुम्बा में जंगली छोटी मधुमक्खी पालने का तरीका विकसित किया है. वे बीते करीब 20 वर्षों से इस विधि से शहद प्राप्त कर रहे हैं. ग्रामीण इन मधुमक्खियों को लोकटी माछी नाम से जानते हैं. इनका शहद औषधीय गुणों के कारण बेहद शुद्ध माना जाता है. गोंचा ने यह ज्ञान अपने पिता सहादेव वैद्यराज से सीखा. परिवार पीढ़ियों से वनौषधियों से लोगों का उपचार करता आया है. पहले शुद्ध शहद के लिए जंगलों में भटकना पड़ता था. अब घर के पास ही नियंत्रित तरीके से उत्पादन संभव हुआ है. एक तुम्बा से पखवाड़े में लगभग 600 ग्राम शहद मिल जाता है. यह प्रयोग ग्रामीण आजीविका और पारंपरिक ज्ञान दोनों को मजबूत कर रहा है. बस्तर की जैव विविधता अब रोजगार का नया रास्ता दिखा रही है.
बाइपास सड़क बनी राहत भी, ट्रकों की पार्किंग भी
जगदलपुर. शहर के यातायात दबाव को कम करने बनी बाइपास सड़क अब नए संकट में है. परपा नाका से सरगीपाल तक बनी सड़क पर ट्रकों की लंबी कतार लग रही है. नई मरम्मत के बाद भारी वाहन तेजी से इसी मार्ग से गुजर रहे हैं. लेकिन सड़क किनारे खड़े ट्रकों ने इसे अघोषित ट्रांसपोर्ट नगर बना दिया है. पहले सड़क जर्जर होने से ट्रक शहर के भीतर से गुजरते थे. अब सड़क बेहतर होने पर चालक स्वेच्छा से बाइपास का उपयोग कर रहे हैं. सरगीपाल में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की योजना अधर में है. ग्रामीण विरोध के कारण जमीन चयन का मामला अटक गया. जब तक वैकल्पिक पार्किंग नहीं बनेगी, समस्या बनी रहेगी. स्थानीय लोगों ने जाम और दुर्घटना की आशंका जताई है. प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग उठ रही है. राहत के लिए बनी सड़क अब नई चुनौती बन चुकी है.
भीषण गर्मी पर सरकार का बड़ा फैसला, स्कूल अवकाश पहले
बीजापुर. प्रदेश में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए स्कूलों की छुट्टियां पहले कर दी गई हैं. अब ग्रीष्मकालीन अवकाश 20 अप्रैल से लागू होगा. पहले यह अवकाश 1 मई से घोषित किया गया था. नई व्यवस्था के अनुसार छुट्टियां 15 जून तक रहेंगी. निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देकर लिया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की सेहत हर हाल में सुरक्षित रहनी चाहिए. भीषण तापमान को देखते हुए अभिभावकों ने भी राहत जताई है. यह आदेश सभी शासकीय और निजी स्कूलों पर लागू रहेगा. गैर अनुदान प्राप्त और अनुदान प्राप्त संस्थान भी शामिल हैं. अचानक गर्मी बढ़ने से स्कूल समय को लेकर चिंता थी. अब छात्रों को गर्मी से बचाव मिलेगा. सरकार का फैसला समयानुकूल कदम माना जा रहा है.
CBSE 10वीं में विद्यार्थियों ने लहराया सफलता का परचम
कोंडागांव. विश्रामपुरी क्षेत्र के विद्यालय के विद्यार्थियों ने 10वीं बोर्ड में शानदार प्रदर्शन किया है. छह छात्रों ने प्रथम श्रेणी में सफलता हासिल कर स्कूल का नाम रोशन किया. सारांश मरकाम ने 92.8 प्रतिशत अंक हासिल किए. आराधना निषाद ने 86.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. सिमरन नाग ने 82.6 प्रतिशत अंक अर्जित किए. अन्य विद्यार्थियों ने भी उल्लेखनीय सफलता दर्ज की. विद्यालय प्रबंधन ने सभी छात्रों को शुभकामनाएं दीं. सफलता का श्रेय मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया गया अभिभावकों की भूमिका भी सराही गई. ग्रामीण क्षेत्र से यह परिणाम प्रेरणादायक माना जा रहा है. छात्रों में आगे की पढ़ाई को लेकर उत्साह है. परिणाम ने क्षेत्र में खुशी का माहौल बना दिया है.
शिक्षक अब तेंदूपत्ता फड़ संभालेंगे, बढ़ा विरोध
सुकमा. सुकमा जिले में 500 से ज्यादा शिक्षकों को तेंदूपत्ता फड़ की जिम्मेदारी दी गई है. शिक्षक अब खरीदी केंद्रों पर फड़ अभिरक्षक की भूमिका निभाएंगे. उन्हें पत्तों की गुणवत्ता, गिनती और परिवहन तक देखना होगा. यह जिम्मेदारी नियमित शैक्षणिक कार्यों के साथ सौंपी गई है. कई शिक्षक पहले से जनगणना जैसे कार्यों में भी लगे हैं. इस अतिरिक्त बोझ को लेकर नाराजगी बढ़ रही है. निर्देशों में अनियमितता पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. गड्डियां कम मिलने पर वसूली तक का प्रावधान बताया गया है. शिक्षकों का कहना है कि पढ़ाई प्रभावित हो सकती है. बीते वर्षों से गैर शैक्षणिक कार्य बढ़ने की शिकायत है. प्रशासन इसे व्यवस्था संचालन के लिए जरूरी बता रहा है. शिक्षा और संग्रहण के बीच संतुलन पर बहस तेज हो गई है.
कृषि किट घोटाले की जांच तेज, करोड़ों की गड़बड़ी के आरोप
बस्तर. आदिवासी किसानों को बीज, खाद और कृषि किट वितरण में बड़े घोटाले के आरोप लगे हैं. एक करोड़ रुपये से ज्यादा की अनियमितता की शिकायत पर जांच शुरू हुई है. मामला वर्ष 2019-20 और 2020-21 से जुड़ा बताया गया है. कई जनपद पंचायतों के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप हैं. दो सप्लाई एजेंसियों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं. आरोप है कि कागजों में खरीदी दिखाकर राशि निकाली गई. जमीनी स्तर पर किसानों तक सामग्री नहीं पहुंची. कई किसानों को यह भी जानकारी नहीं कि उनके नाम किट स्वीकृत थी. अब बिल, वाउचर और रिकॉर्ड तलब किए गए हैं. भौतिक सत्यापन के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी. गड़बड़ी सिद्ध होने पर आपराधिक केस दर्ज हो सकता है. किसान दोषियों पर सख्त कार्रवाई और राशि वसूली की मांग कर रहे हैं.
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