Bastar News Update : जगदलपुर. जगदलपुर और आसपास के 22 ऐतिहासिक मंदिरों में बढ़ते बिजली खर्च ने टेंपल कमेटी की चिंता बढ़ा दी है. रियासतकाल में बने इन मंदिरों में अब बिजली की खपत कम करने के लिए सोलर पैनल लगाने की तैयारी है. दरअसल, कुछ मंदिरों में एसी, इंडक्शन और जरूरत से ज्यादा बिजली सजावट के चलते बिल लगातार बढ़ रहा है. हालात यहां तक पहुंचे कि पिछले दिनों जगन्नाथ मंदिर समेत करीब आधा दर्जन मंदिरों की बिजली काटनी पड़ी. इसके बाद मंदिरों में बिजली के इस्तेमाल और कनेक्शन की व्यवस्था को लेकर समीक्षा की गई. टेंपल कमेटी अब दिन के समय सोलर ऊर्जा से बिजली की जरूरत पूरी करने की योजना बना रही है. शाम के बाद जरूरत के मुताबिक पारंपरिक बिजली का इस्तेमाल किया जाएगा. मां दंतेश्वरी मंदिर में सोलर व्यवस्था शुरू भी कर दी गई है. अब बाकी 21 मंदिरों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की तैयारी है. साथ ही मंदिरों में बिजली के अनावश्यक इस्तेमाल पर जिम्मेदारी तय करने और विभागीय कार्रवाई की बात भी सामने आई है. यानी अब ऐतिहासिक मंदिरों में बिजली का खर्च घटाने के साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत पर जोर दिया जा रहा है.

सुकमा के जंगल में जमीन के नीचे छिपा था नक्सलियों का डंप

सुकमा. चिंतलनार इलाके में सुरक्षा बलों ने जंगल के भीतर छिपाकर रखे नक्सली सामान का बड़ा जखीरा बरामद किया है. छोटा कंचाला के जंगल में खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई. जवानों ने संभावित आईईडी खतरे को देखते हुए डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते की मदद से इलाके की तलाशी ली. तलाशी के दौरान जमीन के नीचे दबे दो लोहे के ड्रम मिले. इन ड्रमों से हथियारों के साथ बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक और संचार उपकरण बरामद किए गए. डंप से सिंगल बैरल बंदूक, वायरलेस सेट, थर्मल इमेजर और राइफल स्कोप जैसी सामग्री मिली है. इसके अलावा मोबाइल फोन, बैटरी, चार्जर, एंटीना, दवाइयां और नक्सली साहित्य भी बरामद हुआ. वायरलेस सेट पर पीएल-04 और पामेड़ डिविजन जैसी यूनिट मार्किंग भी मिली है. अब जांच एजेंसियां इन उपकरणों के इस्तेमाल और नक्सली नेटवर्क से इनके संबंधों की पड़ताल कर रही हैं. सीआरपीएफ के अधिकारियों के मुताबिक बरामद वायरलेस सेट के स्रोत का भी पता लगाया जा रहा है. जंगल में छिपे इस डंप की बरामदगी को लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की अहम कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है.

बीजापुर के जंगल में हथियारों का जखीरा, जमीन के नीचे छिपा था डंप

बीजापुर. बेदरे थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों को सर्चिंग के दौरान बड़ी कामयाबी मिली है.लंका पहाड़ी के जंगल में डिमाइनिंग अभियान के दौरान जमीन के भीतर छिपाकर रखा गया नक्सली डंप बरामद हुआ. तलाशी में हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री मिली है. डंप से एक एसएलआर/एलएमजी रायफल और एक इंसास रायफल बरामद की गई. इसके अलावा 315 बोर बंदूक और दो बीजीएल लॉन्चर भी मिले हैं. सुरक्षा बलों को 17 बीजीएल सेल, एक चाइना हैंड ग्रेनेड और बड़ी संख्या में राउंड भी मिले. डंप से चार एसएलआर मैगजीन और 315 बोर की मैगजीन सहित अन्य सामग्री बरामद हुई है. बरामद हथियार और गोला-बारूद को विधिवत जब्त कर लिया गया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह डंप किस नक्सली नेटवर्क से जुड़ा था. साथ ही जंगल में ऐसे अन्य छिपे ठिकानों की तलाश के लिए सर्चिंग अभियान जारी है. सुरक्षा बलों की नजर अब उन स्थानों पर है जहां नक्सली हथियार और विस्फोटक छिपाकर रख सकते हैं.

बारिश के मौसम में नहीं थमी केके लाइन, चट्टानों से बचाने की तैयारी आई काम

जगदलपुर. किरंदुल से विशाखापट्टनम तक जाने वाली केके लाइन इस मानसून में लगातार रेल परिचालन के लिए चर्चा में रही. घाटियों और पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली इस रेल लाइन पर हर साल चट्टान गिरने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है. लेकिन इस मानसून में अब तक रेल लाइन बाधित होने की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई. यात्री ट्रेनों का परिचालन भी बारिश की वजह से रोकना नहीं पड़ा. इसके पीछे रेलवे की लगातार निगरानी और संवेदनशील हिस्सों में किए गए सुरक्षा कार्य अहम माने जा रहे हैं. पिछले कुछ समय में संभावित खतरे वाले हिस्सों में चट्टानों पर सुरक्षा जालियां लगाने का काम किया गया. साथ ही टूटकर गिरने वाली संभावित चट्टानों को पहले ही हटाया गया. सेफ्टी टीमों की लगातार निगरानी से बारिश के दौरान जोखिम वाले हिस्सों पर नजर रखी गई. केके लाइन रेलवे के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मार्ग से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क की ढुलाई होती है. लाइन बाधित होने से माल परिवहन के साथ यात्री सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है. अब लोगों की नजर केके और रायगढ़ा लाइन के प्रस्तावित दोहरीकरण सहित आगे की सुविधाओं पर है.

चार तहसील, लेकिन सिर्फ दो ब्लॉक, नारायणपुर में कब बदलेगा प्रशासनिक ढांचा?

नारायणपुर. नारायणपुर जिला बने करीब दो दशक हो चुके हैं, लेकिन जिले के प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक सवाल अब भी बना हुआ है. जिले में नारायणपुर और ओरछा समेत चार तहसीलें हैं, लेकिन विकासखंड केवल दो हैं. छोटेडोंगर और कोहकामेटा को तहसील का दर्जा मिल चुका है, लेकिन दोनों अभी स्वतंत्र विकासखंड नहीं हैं. छोटेडोंगर अब भी नारायणपुर विकासखंड के अंतर्गत दर्ज है. वहीं कोहकामेटा को ओरछा विकासखंड का हिस्सा माना जाता है. इन इलाकों में शिक्षा, सड़क, छात्रावास और अन्य विकास कार्य लगातार चल रहे हैं. इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर अलग विकासखंड की मांग लंबे समय से उठती रही है. विकासखंड बनने से ग्रामीण विकास योजनाओं और पंचायत स्तर के कामों के स्थानीय संचालन को नई प्रशासनिक इकाई मिल सकती है. नारायणपुर की भौगोलिक परिस्थितियां और अबूझमाड़ की दुर्गमता इस सवाल को और महत्वपूर्ण बनाती हैं. अब जरूरत इस बात की है कि सरकार स्पष्ट करे कि छोटेडोंगर और कोहकामेटा को लेकर वर्तमान प्रशासनिक प्रस्ताव क्या है. यानी सवाल सिर्फ नया ब्लॉक बनाने का नहीं, बल्कि दुर्गम इलाकों तक प्रशासन की पहुंच और विकास योजनाओं के बेहतर संचालन का भी है.

अबूझमाड़ के दरवाजे तक पहुंची रेल, रावघाट में पहली बार हुआ ट्रेन का ट्रायल

नारायणपुर. 22 सितंबर को रावघाट के लिए एक ऐसा सफर हुआ, जिसका लंबे समय से इंतजार था. ताड़ोकी से रावघाट के बीच बने नए रेलखंड पर पहली बार सीआरएस स्पेशल ट्रेन पहुंची. करीब 17 किलोमीटर लंबे इस हिस्से पर रेल सुरक्षा आयुक्त सुमीत सिंघल की मौजूदगी में ट्रायल किया गया. इस दौरान ट्रैक, विद्युतीकरण, स्टेशन, सिग्नलिंग और सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण हुआ. रावघाट तक ट्रेन पहुंचना दल्ली राजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना का महत्वपूर्ण पड़ाव है. लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस इलाके में निर्माण चुनौतीपूर्ण रहा. सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद परियोजना के काम में तेजी आई और अब ट्रायल तक बात पहुंच गई है. हालांकि सीआरएस निरीक्षण के बाद तकनीकी रिपोर्ट और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी है. इसके बाद नियमित ट्रेन परिचालन की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. रेल कनेक्टिविटी शुरू होने से आगे चलकर रावघाट क्षेत्र के आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को नई सुविधा मिल सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीआरएस की रिपोर्ट के बाद रावघाट तक नियमित ट्रेन कब शुरू होगी.

सुकमा में संभाग स्तरीय खेलों की तैयारी तेज, मैदान से भोजनालय तक जांच

सुकमा. सुकमा के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रस्तावित संभाग स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता की तैयारियां अब अंतिम दौर में हैं. प्रतियोगिता 2026-27 सत्र के लिए आयोजित की जानी है, जिसमें बड़ी संख्या में खिलाड़ी शामिल होंगे. तैयारियों का जायजा लेने कलेक्टर अमित कुमार और सहायक आयुक्त हेमंत कुमार सिन्हा विद्यालय पहुंचे. अधिकारियों ने खेल मैदान और प्रतियोगिता स्थलों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. इसके साथ ही खिलाड़ियों के रहने और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी जानकारी ली गई. कलेक्टर ने शैक्षणिक ब्लॉक में विद्यार्थियों से बातचीत कर पढ़ाई और खेलों को लेकर उनकी रुचि जानी. इसके बाद छात्रावास और भोजनालय की व्यवस्थाओं की भी जांच की गई. भोजन की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता और विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया. अधिकारियों ने खिलाड़ियों को पौष्टिक भोजन और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. विद्यालय के प्राचार्य राजीव कुमार ने प्रतियोगिता को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी. अब विद्यालय प्रबंधन की कोशिश है कि खेल मैदान से लेकर आवास, भोजन और खिलाड़ियों की सुविधाओं तक हर व्यवस्था प्रतियोगिता शुरू होने से पहले पूरी तरह तैयार रहे.

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