Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर की जीवनदायिनी इन्द्रावती नदी अब अपने किनारों को निगलती जा रही है. नदी तट का लगातार कटाव किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है. विशेषज्ञों की मानें तो एनीकट निर्माण के बाद कई स्थानों पर जल प्रवाह का दबाव बढ़ा है. पिचिंग सीमित दूरी तक होने से नदी किनारे की जमीन तेजी से कट रही है. हर साल लाखों पौधे लगाकर कटाव रोकने का दावा किया जाता है. लेकिन सुरक्षा और देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे बच नहीं पाते. कई पौधे बाढ़ में बह जाते हैं तो कई सूखकर खत्म हो जाते हैं.

कभी नदी किनारे अर्जुन और आम के घने पेड़ प्राकृतिक सुरक्षा कवच थे. अब वे या तो कट चुके हैं या कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं. नदी के किनारे बसे किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार कम हो रही है. पौधरोपण अभियान भी अब सवालों के घेरे में है. ग्रामीणों का कहना है कि पौधे लगाने के बाद उनकी निगरानी नहीं होती. ऐसे में इन्द्रावती को बचाने के लिए केवल पौधरोपण नहीं, स्थायी संरक्षण योजना की जरूरत महसूस की जा रही है.  

पांच ग्राम का कोसा, हजारों परिवारों की रोजी-रोटी

जगदलपुर. बस्तर का रैली कोसा सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है. महज पांच ग्राम वजन वाले एक कोसा से करीब एक किलोमीटर लंबा धागा तैयार होता है. हर वर्ष करोड़ों की संख्या में कोसा उत्पादन यहां के गांवों में रोजगार का बड़ा माध्यम बनता है. साल वनों से घिरे बस्तर में रेशम पालन की समृद्ध परंपरा आज भी कायम है. रेशम विभाग द्वारा संचालित प्रगुणन केंद्र इस उद्योग को मजबूती दे रहे हैं. बस्तर में उत्पादित कोसा का प्रसंस्करण प्रदेश के कई जिलों में किया जाता है. यहीं से तैयार वस्त्र देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचते हैं. जापान, सिंगापुर, यूएई सहित कई देशों में इसकी मांग बनी हुई है. कोसा वस्त्र अपनी प्राकृतिक बनावट और आरामदायक गुणों के कारण पसंद किए जाते हैं. धागे के अपशिष्ट से भी गलीचे और दरियां तैयार की जाती हैं. महिला समूहों की भागीदारी ने इस उद्योग को और सशक्त बनाया है. कालीपुर क्षेत्र में महिलाएं धागा निर्माण से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं. बस्तर का कोसा अब स्थानीय उत्पाद से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है.

श्रमदान से बदलेगी तस्वीर, बंजर जमीन पर उगेगी आजीविका

जगदलपुर. बस्तर के नेतानार गांव ने पर्यावरण संरक्षण का एक अनोखा मॉडल पेश किया है. ग्राम सभा और ग्रामीणों ने मिलकर आक्रामक खरपतवार क्रोमोलेना हटाने का अभियान चलाया. निस्तार और मरघट क्षेत्र की भूमि को फिर से उपयोगी बनाने की पहल की गई है. इस अभियान में युवाओं के साथ बुजुर्गों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई. ग्रामीणों ने श्रमदान कर वर्षों से फैले खरपतवार को साफ किया. अब इस खाली जमीन पर फलदार और उपयोगी पौधे लगाने की तैयारी है. बांस, कटहल और जपरा जैसे पौधों का रोपण किया जाएगा. इससे जैव विविधता संरक्षण के साथ आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे. गांव के लोग इसे केवल पौधरोपण नहीं बल्कि भविष्य निर्माण का अभियान मान रहे हैं..वनोपज आधारित आजीविका को भी इससे मजबूती मिलने की उम्मीद है. सामूहिक भागीदारी ने गांव में एक नई ऊर्जा का संचार किया है..ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया है. नेतानार की यह पहल अब आसपास के गांवों के लिए प्रेरणा बन रही है.     

सोशल मीडिया की दोस्ती बनी साजिश, यूपी से आरोपी गिरफ्तार

जगदलपुर. सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती एक युवती के लिए गंभीर अपराध का कारण बन गई. आरोप है कि युवक ने प्रेमजाल में फंसाकर युवती का विश्वास जीता. इसके बाद उसे जगदलपुर बुलाकर होटल में दुष्कर्म किया गया. इतना ही नहीं, आरोपी ने आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. पीड़िता की शिकायत पर कोतवाली थाना में मामला दर्ज किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई. घटना के बाद आरोपी मोबाइल बंद कर फरार हो गया था. पुलिस लगातार तकनीकी साक्ष्य और मुखबिरों के जरिए उसकी तलाश कर रही थी. आखिरकार उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने आरोपी के मोबाइल से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बरामद किए हैं. पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया. जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया. मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

कैंसर के खिलाफ जंग, जांच में 6 मरीजों में पुष्टि

जगदलपुर. बस्तर में कैंसर के खिलाफ लड़ाई अब तकनीक और जागरूकता के सहारे मजबूत होती दिख रही है. धरमपुरा में आयोजित निःशुल्क कैंसर जांच शिविर में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे. शिविर की सबसे बड़ी खासियत अत्याधुनिक मोबाइल कैंसर स्क्रीनिंग वैन रही. विशेषज्ञ डॉक्टरों ने 62 मरीजों की जांच कर स्वास्थ्य परीक्षण किया. जांच के दौरान छह मरीजों में कैंसर की पुष्टि हुई. जबकि नौ मरीज संदिग्ध पाए गए जिन्हें आगे की निगरानी में रखा गया है. मोबाइल वैन में मैमोग्राफी और अन्य आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध थीं. महिलाओं के लिए स्तन और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग भी की गई. विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान ही कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है. चिन्हित मरीजों को उन्नत उपचार के लिए रेफर किया गया है. आयुष्मान और अन्य योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी. स्वास्थ्य विभाग इसे बस्तर में कैंसर नियंत्रण की दिशा में अहम पहल मान रहा है. इस अभियान से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

विशेष पशु रेस्क्यू वाहन उपेक्षा की शिकार

जगदलपुर. कभी दुर्घटनाग्रस्त पशुओं की जान बचाने के लिए भेजी गई रेस्क्यू गाड़ी आज खुद उपेक्षा की शिकार है. करीब एक दशक पहले जिला मुख्यालयों को विशेष पशु रेस्क्यू वाहन उपलब्ध कराए गए थे. उद्देश्य था घायल और बीमार पशुओं को तत्काल उपचार तक पहुंचाना. शुरुआती दौर में वाहन का उपयोग भी किया गया. लेकिन कर्मचारियों की कमी ने पूरी व्यवस्था को ठप कर दिया. अलग स्टाफ की नियुक्ति नहीं होने से वाहन धीरे-धीरे खड़े रह गए. बस्तर में यह वाहन वर्षों से उपयोग के बिना पड़ा हुआ है. अब इसकी हालत ऐसी हो चुकी है कि इसे कबाड़ माना जाने लगा है. पशु कल्याण से जुड़ी यह महत्वपूर्ण सुविधा कागजों तक सीमित होकर रह गई. दुर्घटनाग्रस्त पशुओं को आज भी समय पर मदद नहीं मिल पाती. स्थानीय स्तर पर वाहन संचालन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं बन पाई है. अधिकारी भी स्टाफ की कमी को बड़ी बाधा बता रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पशुधन संरक्षण की यह महत्वपूर्ण योजना आखिर जमीन पर कब लौटेगी.

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