Bastar News Update : जगदलपुर। बस्तर के बड़े आरापुर का प्राकृतिक चंदन वन अब धीरे-धीरे इतिहास बनने की कगार पर पहुंच गया है। कभी यहां 2 हजार से ज्यादा सफेद चंदन के पेड़ थे, लेकिन अब मुश्किल से 200 वृक्ष ही बचे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सक्रिय तस्करों ने जंगल और गांव के आसपास के अधिकांश पेड़ों को काट डाला। आरापुर बस्ती, डोंगरीपारा, शिव मंदिर परिसर और रेलवे लाइन किनारे लगे चंदन वृक्ष भी नहीं बच पाए। करीब 15 साल पहले वन विभाग ने 10 लाख रुपये की सुरक्षा योजना बनाई थी। योजना में तारबाड़, सोलर लाइट और सुरक्षा व्यवस्था शामिल थी, लेकिन काम शुरू ही नहीं हो पाया।

ग्रामीणों ने खुद समिति बनाकर चंदन बचाने की कोशिश की और कुछ तस्करों को पकड़कर पुलिस को भी सौंपा था। इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से तस्करों का नेटवर्क लगातार सक्रिय रहा। अब हालात ऐसे हैं कि प्राकृतिक रूप से विकसित यह दुर्लभ चंदन वन समाप्ति के मुहाने पर खड़ा है। ग्रामीण वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां केवल कहानियों में चंदन वन सुनेंगी। फिलहाल पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
झीरम शहीद स्मारक फिर संवारा गया, बरसी से पहले श्रद्धांजलि की तैयारी
जगदलपुर। 25 मई 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले की बरसी से पहले जगदलपुर में शहीद स्मारक को नया रूप दिया गया है। लालबाग मैदान स्थित झीरम घाटी शहीद स्मारक में नगर निगम ने रंग-रोगन और मरम्मत का काम कराया है। स्मारक परिसर में स्थापित शहीद नेताओं की प्रतिमाओं को भी व्यवस्थित किया गया। कुछ महीने पहले स्मारक में तोड़फोड़ और अव्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी देखरेख की मांग तेज हुई थी। महापौर द्वारा निरीक्षण के बाद निगम ने स्मारक को दुरुस्त करने का निर्णय लिया। बरसी कार्यक्रम से पहले युद्धस्तर पर काम कर परिसर को तैयार किया गया है। हर साल 25 मई को झीरम हमले में शहीद हुए नेताओं और सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस बार भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों के पहुंचने की संभावना है। झीरम हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है। घटना में कई वरिष्ठ नेताओं सहित सुरक्षा जवान शहीद हुए थे। बरसी के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। शहर में स्मारक को लेकर भावनात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।
नक्सल खत्म तो शुरू हुआ ‘लौह खेल’, पहाड़ियों से निकल रहा करोड़ों का अयस्क
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले में नक्सली गतिविधियां कम होने के बाद अब अवैध लौह अयस्क कारोबार तेजी से फैलने लगा है। पंडेवार गांव में ग्रामीणों ने देर रात दो ट्रकों और एक जेसीबी को अवैध अयस्क लोड करते पकड़ लिया। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और वन विभाग मौके पर पहुंचे और वाहनों को जब्त किया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना के बावजूद कार्रवाई में काफी देर हुई। ग्रामीणों के मुताबिक पहाड़ियों से मजदूरों के जरिए अयस्क नीचे लाया जाता है। इसके बाद सुनसान इलाकों में भंडारण कर रात के अंधेरे में ट्रकों से सप्लाई की जाती है। स्थानीय भाषा में इस लौह अयस्क को ‘आलू माल’ कहा जाता है। बताया जा रहा है कि एक ट्रक में 40 से 50 टन तक अयस्क भरा जाता है। अवैध कारोबार में एक ट्रक से डेढ़ से दो लाख रुपये तक का मुनाफा होने की चर्चा है। दो साल पहले भी ऐसे वाहन पकड़े गए थे, लेकिन बाद में छोड़ दिए जाने पर सवाल उठे थे। इस बार भी कार्रवाई कितनी आगे बढ़ती है, इस पर ग्रामीणों की नजर बनी हुई है। वन विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है। वहीं क्षेत्र में अवैध खनिज कारोबार को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर फिर बहस तेज हो गई है।
गर्मी से डबल संकट, पानी घटा और बिजली व्यवस्था हुई बेहाल
जगदलपुर। भीषण गर्मी ने शहर की जल और बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी है। नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में भूजल स्तर नीचे जाने से बोर फेल होने लगे हैं। स्थिति ऐसी है कि कई इलाकों में टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जरूरत के हिसाब से पानी नहीं मिल पा रहा। नगर निगम क्षेत्र में 40 से ज्यादा ट्यूबवेल से जलापूर्ति की जाती है। लेकिन लगातार गिरते जलस्तर के कारण अतिरिक्त पाइप डालने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा। दूसरी ओर बिजली व्यवस्था भी ओवरलोड से चरमराने लगी है। हर घर में कूलर, एसी और पंखों के बढ़ते इस्तेमाल से ट्रांसफार्मर जलने लगे हैं। केबल पिघलने और फाल्ट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रात में दो से तीन बार बिजली गुल होना आम बात बन गई है। स्थानीय लोगों ने घटिया ट्रांसफार्मर और कमजोर केबल खरीद को भी जिम्मेदार ठहराया है। कई मोहल्लों में कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाए जाने की शिकायत सामने आई है। भरी गर्मी में पानी और बिजली की दोहरी मार से आम नागरिकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
खनिज माफियाओं पर शिकंजा, अवैध रेत परिवहन करते 4 वाहन जब्त
बस्तर। बस्तर जिले में प्रशासन ने अवैध खनिज कारोबार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम ने बस्तर और बडांजी क्षेत्र में औचक जांच अभियान चलाया। इस दौरान अवैध रेत परिवहन करते 2 टिप्पर और 2 ट्रैक्टर पकड़ लिए गए। चारों वाहनों को जब्त कर बस्तर थाने की अभिरक्षा में रखा गया है। टीम ने सिर्फ परिवहन ही नहीं बल्कि अवैध भंडारण पर भी कार्रवाई की। पालाबहार और बड़े आमाबाल गांव में डंप की गई रेत को लेकर प्रकरण दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रेत के काले कारोबार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कार्रवाई में खनिज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम शामिल रही। वाहन मालिकों पर भारी जुर्माने की तैयारी भी की जा रही है। प्रशासन का दावा है कि आगे भी इसी तरह की दबिश जारी रहेगी। क्षेत्र में लंबे समय से अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें मिल रही थीं। अब लगातार हो रही कार्रवाई से खनिज कारोबारियों में हड़कंप का माहौल है। वहीं स्थानीय लोग कार्रवाई को और सख्त करने की मांग कर रहे हैं।
हल्बा समाज का सामाजिक अभियान, शादी घरों में डीजे पर फिर सख्ती
कोंडागांव। हल्बा समाज ने पारंपरिक संस्कृति बचाने के अभियान को और तेज कर दिया है। कोपरा स्थित सामाजिक भवन में हुई समीक्षा बैठक में शादी घरों में डीजे बजाने पर सख्त नाराजगी जताई गई। बैठक में बताया गया कि कुछ गांवों में नियमों के खिलाफ डीजे चलाया गया था। जिसके बाद संबंधित लोगों को सामाजिक नोटिस जारी कर कार्रवाई की गई। समाज के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि विवाह समारोहों में डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही छठी कार्यक्रमों में नशापान और रिसेप्शन में बफे सिस्टम बंद करने का भी आह्वान किया गया। वरिष्ठों ने युवाओं को सामाजिक अनुशासन और परंपराओं से जुड़ने की सीख दी। बैठक में कई गांवों के युवक-युवतियों और समाज प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समाज का कहना है कि आधुनिकता के नाम पर पारंपरिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। इसीलिए सामाजिक नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य किया जा रहा है। पदाधिकारियों ने एकजुट होकर संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया। बैठक में सामाजिक मर्यादा बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया। अब आने वाले विवाह सीजन में समाज की नजर नियम तोड़ने वालों पर रहेगी।
अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद, बैठक के बाद निकला समाधान
बस्तर। मोहलई गांव में एक मतांतरित महिला के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा सामाजिक विवाद खड़ा हो गया। परिजन महिला का अंतिम संस्कार गांव के पारंपरिक मुक्तिधाम में करना चाहते थे। जैसे ही इसकी जानकारी ग्रामीणों को मिली, विरोध शुरू हो गया। गांव में तत्काल बैठक बुलाकर समाज प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने चर्चा की। बैठक में यह कहा गया कि मुक्तिधाम का उपयोग वर्षों से पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार होता आया है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने पारंपरिक व्यवस्था बनाए रखने की बात कही। विहिप और बजरंग दल के पदाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे। संगठनों ने स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की बात दोहराई। विवाद बढ़ने के बाद परिवार ने अपना निर्णय बदल दिया। इसके बाद महिला के शव को इसाई कब्रिस्तान ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया। गांव में पूरे दिन सामाजिक और धार्मिक मुद्दों को लेकर चर्चा का माहौल बना रहा। ग्रामीणों ने सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील की। फिलहाल मामले का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से होने के बाद गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

