सुकमा। सुकमा में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत उत्सव और बड़े दावों के साथ हुई थी, लेकिन अब जमीनी तस्वीर उन वादों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। जिले के सैकड़ों प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में आज भी विद्यार्थियों को सभी विषयों की किताबें नहीं मिल पाई हैं।
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सबसे अधिक परेशानी गणित और अंग्रेजी जैसी महत्वपूर्ण विषयों की पुस्तकों की कमी से हो रही है। पहली से आठवीं तक अलग-अलग कक्षाओं में किसी को हिंदी, किसी को गणित तो किसी को अंग्रेजी की किताब का इंतजार है। करीब 38 हजार से अधिक बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

शिक्षकों का कहना है कि बिना पाठ्यपुस्तकों के पढ़ाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। बच्चे ब्लैकबोर्ड से नोट्स तो लिख रहे हैं, लेकिन घर जाकर अभ्यास करने के लिए सामग्री नहीं है। विशेषकर गणित और अंग्रेजी में अभ्यास के अभाव से सीखने की गति धीमी पड़ रही है।
विभाग ने फिलहाल पुराने पाठ्यपुस्तकों और वैकल्पिक माध्यमों से पढ़ाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अभिभावकों का सवाल है कि सत्र का सबसे अहम शुरुआती समय आखिर कौन लौटाएगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लंबित किताबें स्कूलों तक कब पहुंचेंगी। क्योंकि बच्चों की पढ़ाई में हुई यह देरी आगे की शैक्षणिक तैयारी पर भी असर डाल सकती है।
नौकरी छोड़, रोजगार देने वाला बना युवा उद्यमी
जगदलपुर। जहां अधिकांश युवा नौकरी की तलाश में भटकते हैं, वहीं जगदलपुर के किशन जंगम ने जोखिम उठाकर अपना रास्ता खुद बनाया। स्नातक के बाद उन्होंने नौकरी के बजाय स्वरोजगार का सपना चुना। आर्थिक तंगी उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। सरकारी रोजगार सृजन योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया।
बैंक से 10 लाख रुपये का ऋण और सरकारी सब्सिडी मिलने पर प्रिंटिंग व्यवसाय शुरू किया। एफसीआई गोदाम के सामने स्थापित उनकी यूनिट धीरे-धीरे सफलता की राह पर बढ़ती गई। आज उनका कारोबार सालाना 30 से 35 लाख रुपये का टर्नओवर हासिल कर चुका है।
सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी सफलता सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं रही। उन्होंने छह स्थानीय युवाओं को भी स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया है। इस पहल से कई परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। किशन की कहानी बताती है कि सही योजना और मजबूत इरादे युवाओं की दिशा बदल सकते हैं। यह उदाहरण आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार सृजन की प्रेरक मिसाल बन चुका है।
जंगल में मिले रहस्यमयी पदचिह्न, वन विभाग अलर्ट पर
कोंडागांव। कोंडागांव जिले के बिलौरी गांव के पास जंगल में बड़े वन्यजीव के पदचिह्न मिलने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। सूचना मिलते ही वन विभाग की विशेष टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई। पूरे इलाके की घेराबंदी कर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र माचकोट के घने जंगलों से जुड़ा हुआ है। ओडिशा सीमा से लगे क्षेत्रों में भी हाल के दिनों में वन्यजीव की हलचल की जानकारी मिली थी। इसी कड़ी को देखते हुए दोनों राज्यों के वन विभाग आपसी समन्वय से निगरानी कर रहे हैं। थर्मल ड्रोन कैमरों की मदद से जंगल में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
वन विभाग फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले साक्ष्य जुटा रहा है। ग्रामीणों से अकेले जंगल की ओर नहीं जाने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। साथ ही मवेशियों को सुरक्षित बाड़ों में रखने को कहा गया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग या पुलिस को देने की अपील की गई है।
किरायेदार और मेहमान का सत्यापन अब मोबाइल से
जगदलपुर। बस्तर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए डिजिटल पहल शुरू की है। अब मकान मालिक, होटल, लॉज और गेस्ट हाउस संचालकों को थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मोबाइल एप के जरिए घर बैठे किरायेदार और मेहमानों का पुलिस सत्यापन किया जा सकेगा।
मोबाइल एप की वजह से पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन पूरी होगी। इससे समय की बचत के साथ कागजी प्रक्रिया भी कम होगी। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से संदिग्ध गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई संभव होगी। होटल और मकान मालिकों के पास भी सुरक्षित डिजिटल डाटा रहेगा। मोबाइल नंबर से ओटीपी सत्यापन कर यूजर प्रोफाइल तैयार की जाएगी। इसके बाद किरायेदारों और अतिथियों की जानकारी सीधे दर्ज की जा सकेगी।
पुलिस का मानना है कि इससे अपराधियों की पहचान और निगरानी आसान होगी। तकनीक के माध्यम से नागरिक और पुलिस के बीच समन्वय भी बेहतर बनेगा। पुलिस ने सभी नागरिकों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है।
महिला की हत्या के मामले में पति पर शक
जगदलपुर। बस्तर जिले में महिला की हत्या के मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद से मृतका का पति लापता है और पुलिस का संदेह उसी पर केंद्रित है। घटनास्थल से सब्जी काटने वाला चाकू बरामद हुआ है, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने खून के निशान मिटाने का प्रयास किया। घर के बाहर कई दिनों से ताला लगा होने की जानकारी भी मिली है। पुलिस के अनुसार, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। महिला होटल में काम करती थी, और देर रात घर लौटने को लेकर भी अक्सर विवाद होता था।
फिलहाल, कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस की टीम लगातार दबिश दे रही है। जांच अधिकारी जल्द मामले का खुलासा होने का दावा कर रहे हैं। फिलहाल पूरे मामले की हर पहलू से जांच जारी है।
एक भवन में दो स्कूल, बच्चों की पढ़ाई पर बढ़ा दबाव
कोंडागांव। कोंडागांव जिले में एक ही भवन में दो स्कूलों का संचालन अब बड़ी चुनौती बन गया है। अंग्रेजी माध्यम और हिंदी माध्यम विद्यालय में कुल 620 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। अलग भवन नहीं होने के कारण वर्षों से दोनों स्कूल एक ही परिसर साझा कर रहे हैं। कमरों की कमी के चलते कई बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
शिक्षकों को टाइम टेबल बनाने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मध्याह्न भोजन और प्रार्थना सभा का समय भी अलग-अलग समायोजित करना पड़ता है। पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले कम हैं।
अभिभावकों का कहना है कि दोनों स्कूलों के विद्यार्थियों पर इसका असर पड़ रहा है। हिंदी माध्यम के बच्चों में भी अलग भवन की मांग लगातार उठ रही है। शिक्षकों का मानना है कि पर्याप्त कक्ष मिलने से पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी। 620 विद्यार्थी फिलहाल सीमित संसाधनों में अपना भविष्य संवारने की कोशिश कर रहे हैं। अब सभी को अलग स्कूल भवन बनने का इंतजार है।
आवारा कुत्ते के हमले से गांव में दहशत
कोंडागांव। बड़ेराजपुर विकासखंड के छोटेराजपुर गांव में आवारा कुत्ते के हमले से ग्रामीणों में भय का माहौल है। एक ही दिन में कुत्ते ने पांच लोगों को अलग-अलग स्थानों पर काटकर घायल कर दिया।
घायलों में दो महिलाओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। हमले में एक बुजुर्ग महिला के चेहरे और हाथ पर गंभीर चोटें आई हैं। बेटी ने मां को बचाने की कोशिश की तो वह भी हमले का शिकार हो गई। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को बेहतर इलाज के लिए भेजा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी कुत्ते ने गांव के अन्य लोगों और एक बच्चे को भी घायल किया है। घटना के बाद बच्चे घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। गांव में लगातार सतर्कता बरती जा रही है। लोग प्रशासन से आवारा कुत्ते को पकड़ने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग भी घायलों के उपचार और एंटी-रेबीज वैक्सीन की व्यवस्था में जुटा है। फिलहाल पूरे गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है।
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