Bastar News Update : जगदलपुर रेलवे स्टेशन पर इस बार सिर्फ चेकिंग नहीं हुई, बल्कि सुरक्षा का ऐसा लाइव ट्रायल दिखा जिसने यात्रियों को भी चौकन्ना कर दिया। आरपीएफ ने स्टेशन और ट्रेनों में सघन एंटी-सैबोटॉज व नारकोटिक्स अभियान चलाया, जिसकी कमान निरीक्षक प्रवीण कुमार ने संभाली।
ऑपरेशन का सबसे बड़ा चेहरा बना स्नीफर डॉग ‘शेरा’, जिसने स्टेशन के हर संवेदनशील हिस्से को सूंघकर खंगाला। ट्रेन नंबर 58502, 18107 और 18447 में डिब्बों के भीतर तक तलाशी ली गई। वेटिंग हॉल, पार्सल एरिया और सर्कुलेटिंग एरिया में संदिग्ध सामानों की जांच की गई। यात्रियों के बैग और लावारिस वस्तुओं पर विशेष नजर रखी गई। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि पहले भी ऐसे अभियानों में गांजा और अवैध सामान पकड़े जा चुके हैं। इसी वजह से स्टेशन को लगातार हाई अलर्ट मोड में रखा गया है।

हालांकि इस बार कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन अभियान ने असामाजिक तत्वों में डर जरूर पैदा किया। रेलवे सुरक्षा बल का कहना है कि अचानक होने वाले ऐसे ऑपरेशन आगे भी जारी रहेंगे। ‘शेरा’ जैसे प्रशिक्षित श्वान अब रेलवे सुरक्षा की मजबूत कड़ी बन चुके हैं। उद्देश्य साफ है… सफर सुरक्षित रहे और स्टेशन अपराधियों के लिए असुरक्षित बने।
जंगल धधक रहे, सवालों में निगरानी व्यवस्था
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा के जंगलों में आग अब हादसा नहीं, लगातार दोहराई जा रही चेतावनी बनती जा रही है। राजा बंगला और चंदेनार के बाद अब पंडेवार की पहाड़ियां आग की चपेट में आ गई हैं। सोमवार को कई जगहों पर जंगल धधकते रहे और दूर तक धुएं का गुबार दिखाई देता रहा। ग्रामीणों का दावा है कि आधा दर्जन से ज्यादा स्थानों पर आग लगी थी। सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि आग फैलती रही लेकिन मौके पर तत्काल बुझाने की व्यवस्था क्यों नहीं दिखी।
स्थानीय लोग वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। वन विभाग के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। जनवरी से मई के बीच जिले में 422 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। यानी हर दिन औसतन दो से ज्यादा जगह जंगल जल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकार के लिए जानबूझकर आग लगाई जाती है। आग के बाद छोटे वन्यजीव खुले इलाकों में आ जाते हैं और शिकार आसान हो जाता है। डीएफओ रंगानाधा रामकृष्णा वाय ने टीम भेजकर जांच और आग बुझाने की कार्रवाई की बात कही है। लेकिन लगातार तीसरी बड़ी घटना ने वन सुरक्षा तंत्र की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
पहाड़ियों से मैदान तक… अवैध लौह अयस्क का पूरा नेटवर्क बेनकाब
दंतेवाड़ा। पंडेवार में दो ट्रक और एक जेसीबी की जब्ती के बाद अब लौह अयस्क के बड़े खेल की परतें खुलने लगी हैं। पंडेवार से बैलाडीला तक कई जगह खुले में अयस्क के बड़े-बड़े ढेर मिले हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहाड़ियों से ट्रैक्टरों के जरिए अयस्क नीचे लाया गया। इसके बाद ट्रकों से बाहर भेजने की तैयारी चल रही थी।
कई जगह अस्थायी रास्ते भी बनाए गए हैं, जिससे साफ है कि यह काम लंबे समय से चल रहा था। जानकारों के मुताबिक एक ट्रक में 40 से 50 टन तक लौह अयस्क लोड होता है। एक खेप की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये तक बताई जा रही है। यानी यह सिर्फ छोटे स्तर की चोरी नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क का संकेत माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुले में हो रहा इतना बड़ा भंडारण विभागीय निगरानी से कैसे बच गया। पहाड़ियों के नीचे दर्जनों ट्रक लम्प्स जमा होने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मौका देखकर माल बाहर भेजने की तैयारी थी। डीएफओ ने जांच टीम भेजने और अवैध भंडारण मिलने पर जब्ती की बात कही है। अब नजर इस बात पर है कि कार्रवाई सिर्फ वाहनों तक सीमित रहती है या पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है।
नौतपा की शुरुआत, लेकिन मौसम ने बदला मिजाज
बस्तर। नौतपा शुरू होते ही जहां तेज तपिश की उम्मीद थी, वहीं बस्तर में पहले दिन मौसम ने अलग तस्वीर दिखाई। सुबह से बादल छाए रहे, हालांकि दोपहर बाद तेज धूप निकल आई। सोमवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए बस्तर, कोंडागांव और कांकेर में ग्रीष्मलहर की चेतावनी जारी की है। इस बार नौतपा शुरू होने से पहले ही तापमान 43 डिग्री तक पहुंच चुका था। इसी वजह से लोगों को रिकॉर्ड गर्मी का अंदेशा बना हुआ है। मान्यता है कि नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं। इसी कारण इन नौ दिनों में तापमान तेजी से बढ़ता है। हर साल इस दौरान बस्तर में मौसम अचानक बदलने और बारिश होने की स्थिति भी बनती है। सोमवार को बादल छाने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली। लेकिन दोपहर की धूप ने गर्मी का असर महसूस करा दिया। लोग अब आने वाले दिनों में तापमान 44 डिग्री तक पहुंचने की आशंका जता रहे हैं। मौसम का यही बदलता मिजाज इस बार नौतपा को और दिलचस्प बना रहा है।
स्कूलों के रिजल्ट पर सख्ती, अब 75% उपस्थिति जरूरी
सुकमा। सुकमा में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। कलेक्टर अमित कुमार ने जिले के स्कूलों की मैराथन समीक्षा बैठक लेकर साफ संदेश दिया कि कमजोर प्रदर्शन अब बर्दाश्त नहीं होगा। बैठक में हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षक और छात्रावास अधीक्षक शामिल हुए। हर स्कूल के परीक्षा परिणाम की वन-टू-वन समीक्षा की गई। बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को सम्मानित किया गया। वहीं कमजोर परिणाम वाले विद्यालयों को चेतावनी और सुधार के निर्देश दिए गए। अब बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की जाएगी। कम उपस्थिति वाले छात्रों को रेगुलर की जगह प्राइवेट या ओपन स्कूल से परीक्षा दिलाने की तैयारी है। कक्षा 9वीं और 11वीं के कमजोर छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी लगेंगी। छात्रावासों और आश्रमों में बायोमेट्रिक मशीनें लगाने का फैसला लिया गया है। छात्रों को दिन में दो बार उपस्थिति दर्ज करनी होगी। हर महीने टेस्ट और समीक्षा बैठकें भी होंगी। कलेक्टर ने साफ कहा है कि अगले सत्र में खराब परिणाम पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई तय होगी।
एक साइड ने पलट दी ट्रक, बड़ा हादसा टला
कोंडागांव। कोंडागांव बायपास पर देर रात एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। पशु आहार से लदी ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। हादसा रात करीब एक बजे का बताया जा रहा है। ट्रक दुर्ग से आंध्रप्रदेश के विजयनगरम जा रही थी। इसी दौरान सामने से आ रहे वाहनों को साइड देने की कोशिश में ट्रक का चक्का मिट्टी में धंस गया। चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और ट्रक पलट गई। हादसे में चालक और कंडक्टर को मामूली चोटें आईं। गनीमत रही कि उस वक्त सड़क पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। दुर्घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस भी घटनास्थल पहुंची और हालात का जायजा लिया। कुछ देर तक यातायात प्रभावित रहा। बाद में क्रेन की मदद से ट्रक हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
भीषण गर्मी में पशुओं को राहत, दोपहर में बैलगाड़ी बंद
सुकमा। सुकमा प्रशासन ने भीषण गर्मी के बीच बेजुबान जानवरों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। जिले में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पशुओं से चलने वाले सभी परिवहन साधनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश 30 जून 2026 तक लागू रहेगा। निर्देश के तहत बैलगाड़ी, भैंसागाड़ी, ऊंटगाड़ी, टांगा, खच्चर और गधों से सामान ढोने पर रोक रहेगी। प्रशासन का कहना है कि तेज गर्मी में पशुओं पर अत्यधिक भार डालना क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के निर्देश पर कलेक्टर अमित कुमार ने आदेश जारी किया है। गर्मी के दौरान पशुओं में लू और थकावट का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में दोपहर के सबसे गर्म समय में संचालन रोकने का फैसला लिया गया। अधिकारियों ने नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। प्रशासन ने पशु मालिकों और व्यापारियों से सहयोग की अपील भी की है। जिला प्रशासन का कहना है कि मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। भीषण गर्मी में अब बेजुबानों को भी राहत देने की कोशिश दिखाई दे रही है।
राष्ट्रीय फुटबॉल से खेलमय हुआ बस्तर
जगदलपुर। जगदलपुर इन दिनों सिर्फ संस्कृति नहीं, खेल की ऊर्जा से भी सराबोर नजर आ रहा है। रामकृष्ण मिशन आश्रम और एआईएफए के संयुक्त आयोजन में स्वामी विवेकानंद अंडर-20 मेन्स नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिता चल रही है। देश के 35 राज्यों की टीमें इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं। 27 मई को फाइनल मुकाबला केरल और मिजोरम के बीच खेला जाएगा। मैच का सीधा प्रसारण एआईएफए के अधिकृत यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। लाइव प्रसारण की जिम्मेदारी जगदलपुर की स्थानीय टीम को सौंपी गई है। पूर्व नेशनल रेफरी विश्वजीत भट्टाचार्य और उनकी टीम तकनीकी जिम्मेदारी संभाल रही है। इस आयोजन ने पूरे बस्तर में खेल का नया माहौल बना दिया है। स्थानीय युवाओं को राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को करीब से देखने और सीखने का मौका मिल रहा है।
रामकृष्ण मिशन की इस पहल की लोग सराहना कर रहे हैं। खेल मैदान हर दिन रोमांचक मुकाबलों का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय दर्शकों में भी फाइनल को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर का यह आयोजन अब बस्तर की नई खेल पहचान बनता नजर आ रहा है।
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