Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर की पहचान अब सिर्फ जंगल, झरनों और पारंपरिक जैव विविधता तक सीमित नहीं रह गई है. यहां की मिट्टी में दुनिया के दूसरे हिस्सों में पाए जाने वाले दुर्लभ फलदार पौधों को भी आजमाया जा रहा है. ट्री-मैन सम्पत झा के उद्यान में मध्य अमेरिका की दुर्लभ प्रजाति गार्सिनिया इंटरमीडिया ने फल देकर नई उम्मीद जगाई है. मेक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पनामा और कोलंबिया जैसे क्षेत्रों में मिलने वाला यह फल अब बस्तर में विकसित हो रहा है. खास बात यह है कि पौधे ने यहां की जलवायु और मिट्टी के साथ खुद को अनुकूल साबित किया है. सम्पत झा इससे पहले विश्व प्रसिद्ध मियाजाकी आम का भी बस्तर में सफल प्रयोग कर चुके हैं. इन प्रयोगों से यह संभावना मजबूत हो रही है कि बस्तर में फलदार प्रजातियों की विविधता और बढ़ाई जा सकती है. हालांकि विदेशी प्रजातियों के साथ स्थानीय और देशी फलों के संरक्षण पर भी बराबर जोर दिया जा रहा है. उद्देश्य केवल नई प्रजातियां उगाना नहीं, बल्कि बस्तर की हरियाली और जैव विविधता को समृद्ध करना है. आंगन, खेतों की मेड़, स्कूल और सार्वजनिक स्थान इस तरह के प्रयोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. यानी बस्तर अब अपनी पारंपरिक हरियाली के साथ दुनिया के दुर्लभ फलों के लिए भी प्रयोगशाला बनता नजर आ रहा है.  

गिद्धों की संख्या बढ़ी (Bastar News Update)

बीजापुर. कभी बस्तर के आसमान से गिद्धों की उड़ान लगभग गायब होने लगी थी. लेकिन इंद्रावती टाइगर रिजर्व में संरक्षण की कोशिशों ने इस तस्वीर को बदलना शुरू कर दिया है. वर्ष 2020 में जहां गिद्धों की संख्या महज चार रह गई थी, वहां अब इनकी संख्या सैकड़ों तक पहुंचने की बात सामने आई है. गिद्धों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए यहां वल्चर कैफे यानी सुरक्षित भोजन स्थल भी बनाया गया है. यहां पशु चिकित्सा जांच के बाद विषमुक्त मवेशियों के शव गिद्धों के लिए रखे जाते हैं. गिद्धों की गतिविधियों को समझने के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. दो गिद्धों की ट्रैकिंग से हजारों उच्च गुणवत्ता वाले डेटा पॉइंट हासिल किए गए हैं. करीब 10 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में गिद्धों की आवाजाही ने इनके संरक्षण का दायरा भी स्पष्ट किया है. पंचायतों की भागीदारी से लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र में गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र बनाने की पहल की गई है. बस्तर में गिद्धों का रिश्ता सिर्फ पर्यावरण से नहीं, बल्कि जटायु की पौराणिक कथा से भी जुड़ा हुआ है. अब संरक्षण की इन कोशिशों ने बस्तर को गिद्धों की वापसी की उम्मीद का महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है.

जब बेलमेटल में पत्थर जुड़ा, शिल्प को मिला नया चेहरा

कोंडागांव. कोंडागांव की पारंपरिक घड़वा कला अब पुराने रूप तक सीमित नहीं रहना चाहती. खुटपारा सोनाबाल और मर्दापाल क्षेत्र के शिल्पकार पारंपरिक बेलमेटल के साथ पत्थर का नया संयोजन कर रहे हैं. प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवन से जुड़े स्वरूपों को इन कलाकृतियों में नया आकार दिया जा रहा है. धातु की बारीक कारीगरी और पत्थर की मजबूती मिलकर इन शिल्पों को अलग पहचान दे रही है. यह प्रयोग बताता है कि परंपरा को बचाने के साथ उसमें समय के मुताबिक बदलाव भी किया जा सकता है. कोंडागांव में हस्तशिल्प को रोजगार और पर्यटन से जोड़ने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं. अगर स्थानीय शिल्प को डिजाइन, आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ा जाए तो इसकी पहुंच दूर तक हो सकती है. हस्तशिल्प बाजार, शिल्प ग्राम और नियमित प्रदर्शनियां पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन सकती हैं. इसके साथ शिल्पकारों को प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और विपणन की बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत भी सामने आती है. ऐसा होने पर स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं. यानी कोंडागांव की कला अब केवल विरासत नहीं, बल्कि पर्यटन और अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनने की ओर बढ़ रही है.

पुलिस की नौकरी का झांसा, तीन महीने की जांच के बाद खुला फर्जीवाड़ा

कोंडागांव. पुलिस विभाग में नौकरी का सपना दिखाकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ऐंठने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. फरसगांव और कोंडागांव पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि करीब 15 युवाओं को बस्तर फाइटर और जिला पुलिस बल में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था. इसके बदले युवाओं से करीब 25 से 30 लाख रुपये की रकम वसूले जाने की शिकायत सामने आई. आरोपी खुद को पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क वाला बताकर युवाओं को भरोसे में लेते थे. नौकरी के नाम पर सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि आधार कार्ड, अंकसूची और प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भी लिए जाते थे. मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने करीब तीन महीने तक बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन का विश्लेषण किया. तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को पहले मुख्य आरोपी तक पहुंचाया, जिसे बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया. इसके बाद उसके साथी को भी फरसगांव क्षेत्र से पकड़ा गया. पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल, डायरी, रजिस्टर और पीड़ितों के दस्तावेजों से जुड़ी फाइलें जब्त की हैं. कार्रवाई के बाद अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि इस गिरोह ने और कितने युवाओं को अपने जाल में फंसाया.

इंद्रावती पर पुल से बदलेगी नदी पार के गांवों की तस्वीर (Bastar News Update)

जगदलपुर. लोहण्डीगुड़ा की बिंता घाटी के नीचे बसे गांवों के लिए इंद्रावती पर बन रहा पुल सिर्फ सड़क का निर्माण नहीं है. यह उन ग्रामीणों के लिए स्थायी कनेक्टिविटी की उम्मीद है, जो आज भी नदी पार करने के लिए लकड़ी की डोंगी पर निर्भर हैं. सतलपुर से कांटाबांस के बीच करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण किया जा रहा है. पुल तक पहुंचने वाली पक्की सड़क का काम भी शुरू हो चुका है. नदी के उस पार कांटाबांस, चंदेला, धर्माबड़ा, अमलीधार और कोड़ेनार जैसे गांवों की आवाजाही बरसात में बेहद मुश्किल हो जाती है. जलस्तर बढ़ने पर मुख्यालय से संपर्क टूटने का खतरा बना रहता है. पुल बनने के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं की पहुंच इन गांवों तक आसान होने की उम्मीद है. ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से उठ रही मांग अब जमीन पर दिखाई दे रही है. लेकिन निर्माण की धीमी रफ्तार उनकी चिंता भी बढ़ा रही है. इसी बीच बोधघाट परियोजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि भविष्य में जलभराव की स्थिति बनी तो क्या यह पुल प्रभावित होगा. ऐसे में पुल और प्रस्तावित परियोजना के बीच तकनीकी और प्रशासनिक समन्वय बेहद जरूरी माना जा रहा है.

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