Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में बिजली चोरी रोकने के लिए विद्युत विभाग की केबल लाइन व्यवस्था असर दिखा रही है. जिन इलाकों में खुले तारों से हुकिंग कर बिजली चोरी की जाती थी, वहां अब यह रास्ता काफी मुश्किल हो गया है. विभाग पुराने खुले तारों को हटाकर कई क्षेत्रों में केबलयुक्त विद्युत लाइन बिछा रहा है. इससे सीधे लाइन से अवैध कनेक्शन लेने की संभावना कम हुई है. बिजली चोरी लंबे समय से विभाग के लिए बड़ी चुनौती रही है. अवैध कनेक्शन का असर सिर्फ विभाग पर नहीं, बल्कि नियमित बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है. हुकिंग के कारण लाइन पर अतिरिक्त भार बढ़ता है और कई बार विद्युत आपूर्ति भी प्रभावित होती है. केबल व्यवस्था से बिजली चोरी पर रोक के साथ लाइन की सुरक्षा भी बढ़ी है. विभाग की ओर से अवैध कनेक्शन के खिलाफ जांच और कार्रवाई भी जारी है. अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक लाइन व्यवस्था से बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल रही है. आने वाले समय में अन्य संवेदनशील इलाकों में भी खुले तारों की जगह केबल लगाने पर जोर दिया जा रहा है. यानी बस्तर में बिजली चोरी रोकने के लिए सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि व्यवस्था को ही मजबूत किया जा रहा है.
सड़क बनी तो राहत की उम्मीद थी, गड्ढों ने बढ़ा दी परेशानी
जगदलपुर. हाता ग्राउंड से जिला न्यायालय तक जाने वाली सड़क अब सुविधा के बजाय लोगों की परेशानी का कारण बनती जा रही है. कभी उड़ती धूल से परेशान रहे लोगों को अब सड़क पर बने गड्ढों से जूझना पड़ रहा है. करीब एक साल पहले इस मार्ग के चौड़ीकरण का काम शुरू किया गया था. लेकिन निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं होने से सड़क की हालत लगातार बिगड़ती गई. बताया जा रहा है कि मार्ग के एक हिस्से में ही बजरी-गिट्टी डालकर काम किया गया, जबकि दूसरा हिस्सा अधूरा छोड़ दिया गया. जिस हिस्से में काम हुआ, वहां भी जगह-जगह गड्ढे उभर आए हैं. यह मार्ग बस स्टैंड, न्यायालय और संजय बाजार जैसे प्रमुख इलाकों को जोड़ता है. ऐसे में रोज बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही इस सड़क से होती है. बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से दोपहिया वाहन चालकों की मुश्किल और बढ़ गई है. स्थानीय नागरिक अधूरे काम को जल्द पूरा करने और गड्ढों की मरम्मत की मांग कर रहे हैं. लोगों का सवाल है कि जब सड़क शहर के इतने महत्वपूर्ण हिस्से में है तो इसकी बदहाली पर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं पड़ रही. अब निगाहें लोक निर्माण विभाग और जनप्रतिनिधियों पर हैं कि सड़क को कब तक पूरी तरह दुरुस्त कराया जाता है.
तेंदुए की खाल लेकर निकले तीन आरोपी पकड़े गए
नारायणपुर. जिले में वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. धौड़ाई क्षेत्र में गश्त के दौरान टीम ने तीन संदिग्धों को दो मोटरसाइकिलों के साथ पकड़ा. तलाशी में उनके पास से तेंदुए की खाल बरामद हुई. वन विभाग के मुताबिक जब्त खाल की लंबाई करीब 184 सेंटीमीटर है. मौके से दोनों मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई हैं. पकड़े गए आरोपियों की पहचान सोनूराम कचलाम, पुनीत कुमार बघेल और जमधर पोटाई के रूप में हुई है. वन अमले ने तीनों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. पूछताछ के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया. अब वन विभाग की जांच सिर्फ इन तीन आरोपियों तक सीमित नहीं है. खाल कहां से आई और इसे कहां पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इसके पीछे कोई बड़ा तस्करी नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है. वन्यजीवों की सुरक्षा के बीच यह कार्रवाई तस्करों के लिए साफ संदेश है कि जंगल से वन्यजीवों का अवैध कारोबार आसान नहीं होगा.
सड़क पर मवेशी, खेतों में नुकसान—बकावंड में दोहरी परेशानी
जगदलपुर. बकावंड ब्लॉक के कई इलाकों में आवारा मवेशी अब किसानों के साथ राहगीरों के लिए भी बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं. धोबीगुड़ा, इरिकपाल, मालगांव सहित कई क्षेत्रों में रात होते ही सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा दिखाई देता है. सैकड़ों की संख्या में गाय, बैल और बछड़े मुख्य मार्गों पर बैठे या घूमते रहते हैं. बारिश में गीली सड़क और अंधेरे के बीच इनसे टकराने का खतरा और बढ़ जाता है. सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को होती है. वहीं दिन के समय यही मवेशी खेतों में पहुंचकर किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं. किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए उन्हें दिन-रात खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है. ग्रामीणों ने खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशु मालिकों पर कार्रवाई की मांग की है. लोगों का सुझाव है कि पंचायत स्तर पर अस्थायी गौठान बनाकर चारा-पानी की व्यवस्था की जाए. लापरवाह पशु मालिकों पर जुर्माना लगाने की मांग भी उठ रही है. ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन इस समस्या को सिर्फ सड़क सुरक्षा का मुद्दा न मानकर किसानों की परेशानी से भी जोड़कर देखे. अब जरूरत ऐसे स्थायी इंतजाम की है जिससे सड़क भी सुरक्षित रहे और किसानों की फसल भी बच सके.
इलाज कैशलेस, लेकिन पैकेज की जानकारी कितनी साफ?
जगदलपुर. आयुष्मान भारत योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज का बड़ा सहारा है. पात्र मरीजों को योजना के तहत पांच लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है. बस्तर के कई निजी अस्पतालों में भी आयुष्मान कार्ड से मरीजों का इलाज किया जा रहा है. लेकिन कुछ मरीजों और परिजनों ने इलाज के बाद पैकेज और खर्च की जानकारी स्पष्ट नहीं मिलने के आरोप लगाए हैं. आरोप है कि इलाज के दौरान दस्तावेज और थंब इंप्रेशन तो लिया जाता है, लेकिन डिस्चार्ज के समय पैकेज की पूरी जानकारी नहीं दी जाती. कुछ मरीजों ने अतिरिक्त दवाइयों और अन्य सामग्री के नाम पर राशि मांगे जाने की बात भी कही है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. मरीजों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने वाले हर व्यक्ति को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उसके नाम पर कौन-सा पैकेज स्वीकृत हुआ. डिस्चार्ज के समय इलाज, दवाइयों और स्वीकृत पैकेज का लिखित विवरण मिलना चाहिए. मरीजों को आयुष्मान मित्र या हेल्प डेस्क से भी आवश्यक जानकारी मिलनी चाहिए. एक मरीज ने इलाज के दौरान कई जांच और भर्ती की सलाह मिलने, जबकि बाद में जिला अस्पताल में उपचार से राहत मिलने की बात कही है. अब सवाल योजना के लाभ से ज्यादा उसकी पारदर्शिता का है मरीज के नाम पर कितना पैकेज स्वीकृत हुआ और कितना खर्च दर्ज किया गया, यह जानकारी साफ होनी चाहिए.

खेत में लहलहाती फसल, लेकिन अब कीटों पर नजर जरूरी
जगदलपुर. बस्तर में खरीफ धान की फसल अब बढ़वार की अवस्था में पहुंच रही है और खेतों में हरियाली नजर आने लगी है. लेकिन इसी दौर में मौसम की नमी और तापमान में बदलाव किसानों की चिंता बढ़ा सकते हैं. लगातार बारिश और नमी के बीच धान में कीट प्रकोप की संभावना बढ़ने लगी है. तना छेदक, पत्ती लपेटक और रस चूसक कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. तना छेदक के प्रकोप से पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और बाद में सफेद बालियां दिखाई दे सकती हैं. वहीं रस चूसक कीट पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देते हैं. कृषि विशेषज्ञ किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह दे रहे हैं. किसानों को सप्ताह में दो से तीन बार फसल का निरीक्षण करना चाहिए. पत्तियों पर असामान्य धब्बे, पत्तियों का मुड़ना या पौधों का अचानक कमजोर होना दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. शुरुआती स्तर पर कीट की पहचान होने से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है. धान बस्तर की प्रमुख खरीफ फसल है, इसलिए कीट प्रकोप का सीधा असर किसानों की उपज पर पड़ सकता है. अब खेत में सिर्फ पानी और खाद पर नहीं, बल्कि हर पौधे पर नजर रखना किसानों के लिए जरूरी हो गया है.
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