Bastar News Update : जगदलपुर. माओवाद प्रभावित बस्तर में सुरक्षा के साथ विकास की बदलती तस्वीर को समझने चेन्नई की पीआईबी मीडिया टीम जगदलपुर पहुंची. पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में अधिकारियों ने टीम को बस्तर में आए बदलावों की विस्तृत जानकारी दी. कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा और जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना ने प्रस्तुति दी. टीम को बताया गया कि सुरक्षा अभियानों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी गति दी गई है. सड़क, शिक्षा, रोजगार, अधोसंरचना और सरकारी योजनाओं की पहुंच को बदलाव का आधार बताया गया. पीआईबी टीम ने योजनाओं के असर को कागजों से बाहर जमीन पर जाकर देखने की कोशिश की. पण्डूम कैफे में पुनर्वासित लोगों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए बदलावों को समझा गया. स्वरोजगार से जुड़ने और समाज की मुख्यधारा में लौटने के अनुभवों पर भी संवाद हुआ. एकलव्य विद्यालय में विद्यार्थियों से बातचीत कर शिक्षा, सुविधाओं और भविष्य की उम्मीदों को जाना गया. बच्चों के आत्मविश्वास और आगे बढ़ने के सपनों ने बस्तर की बदलती तस्वीर का एक अलग पक्ष सामने रखा. प्रवास के दौरान टीम ने चित्रकोट जलप्रपात की प्राकृतिक खूबसूरती का भी अनुभव किया. टीम ने सुरक्षा, पुनर्वास, शिक्षा और रोजगार को बस्तर में बदलाव की अहम कड़ियों के रूप में देखा. चेन्नई से आई टीम का यह दौरा बस्तर की बदलती पहचान और विकास की नई संभावनाओं को करीब से समझने का प्रयास रहा.
त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा का पहरा
जगदलपुर. रक्षाबंधन से पहले बस्तर में लोगों की थाली तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने के लिए जांच अभियान शुरू हो गया है. खाबो, बने रहिबो 2.0 अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने जगदलपुर समेत कई इलाकों में जांच की. होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर नमूने लिए जा रहे हैं. 17 से 24 अगस्त तक चलने वाले अभियान में मिठाई और दूध से जुड़े कारोबार पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. मावा, पनीर, क्रीम, चीज और अन्य दुग्ध उत्पादों की वास्तविक गुणवत्ता और स्वरूप की जांच होगी. बिना लेबल बिक रहे खाद्य पदार्थों के साथ सामग्री और उसके स्रोत की जानकारी भी जांच के दायरे में है. अधिकारियों की नजर प्रतिबंधित रंग और खाद्य सामग्री की गलत प्रस्तुति पर भी रहेगी. दुकानदारों से बिल, सप्लायर की जानकारी और कच्चे माल के स्रोत से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट में बटर-पनीर के नाम पर इस्तेमाल हो रहे उत्पादों की भी जांच की जाएगी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल वनस्पति वसा मिलने से किसी मिठाई को प्रतिबंधित उत्पाद नहीं माना जाएगा. उत्पाद का नाम, उसकी सामग्री, प्रस्तुतीकरण और लागू खाद्य मानकों को मिलाकर स्थिति तय होगी. नियमों का उल्लंघन और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. त्योहारों के बीच अभियान का उद्देश्य बाजार में सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.
अबूझमाड़ के योद्धाओं को राष्ट्रपति का सम्मान
नारायणपुर. अबूझमाड़ के कठिन जंगलों में नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने वाले पुलिसकर्मियों के साहस को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नारायणपुर पुलिस से जुड़े 32 अधिकारी और जवान राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित हुए हैं. यह सम्मान उन अभियानों की कहानी कहता है, जिनमें सुरक्षा बलों ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मोर्चा संभाला. घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और सीमित संसाधनों के बीच हर अभियान सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती रहा है. इन्हीं परिस्थितियों में अधिकारियों और जवानों ने साहस, रणनीति और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया. नारायणपुर में उप पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवाएं दे चुके विनय कुमार साहू और प्रशांत देवांगन भी सम्मानित हुए हैं. छोटेडोंगर के तत्कालीन प्रभारी उप निरीक्षक हरिशंकर ध्रुव को भी वीरता पदक प्रदान किया गया है. नारायणपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुड़िया के नेतृत्व में चले अभियानों का योगदान भी सम्मान में शामिल है..वर्तमान एसपी संदीप कुमार पटेल भी राष्ट्रपति वीरता पदक पाने वाले अधिकारियों में शामिल हैं. अबूझमाड़ में 21 मई 2025 का अभियान सुरक्षा बलों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना गया. इस अभियान में माओवादी संगठन के शीर्ष नेता बसवराजू समेत 27 माओवादी मारे गए थे. इसके बाद अबूझमाड़ में सुरक्षा बलों की बढ़ती पकड़ को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा गया. 32 पुलिस अधिकारियों और जवानों का सम्मान अबूझमाड़ के कठिन मोर्चे पर लड़ी गई लंबी लड़ाई की वीरता को राष्ट्रीय पहचान देता है.
सरकारी चने की हेराफेरी पर शिकंजा
सुकमा. सुकमा के गोलापल्ली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के खाद्यान्न की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है. पुलिस ने उचित मूल्य दुकान के विक्रेता, तौलक और वाहन चालक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई के दौरान 15 बोरी सरकारी चना बरामद किया गया, जिसका कुल वजन 738 किलो 600 ग्राम बताया गया है. चना परिवहन में इस्तेमाल पिकअप वाहन को भी पुलिस ने जब्त किया है. 8 अगस्त को ग्रामीणों ने दुकान से चने की बोरियां पिकअप में लोड कर ले जाने की सूचना पुलिस को दी थी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने वाहन और उसमें लदे चने को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. मामले की पुष्टि के लिए खाद्य विभाग को सूचना दी गई और जांच कराई गई. जांच में बरामद चना सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण के लिए आवंटित सरकारी सामग्री पाया गया. इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए और 13 अगस्त को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों में पोडियम राजू, पोडियम कृष्णा और वाहन चालक सम्पत रेड्डी शामिल हैं. तीनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया. गोलापल्ली थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम और बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी चने की इस कथित हेराफेरी में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं.
कांवड़ में मरीज, दुर्गम गांवों की बड़ी चुनौती
सुकमा. सुकमा के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचना आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. कई गांवों में गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती. ऐसी स्थिति में परिजन मरीज को कांवड़, चारपाई या दूसरे साधनों के सहारे कई किलोमीटर तक ले जाने को मजबूर होते हैं. बारिश के मौसम में जंगल और पहाड़ी इलाकों की कठिन राह इस परेशानी को और बढ़ा देती है. गंभीर मरीज, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार दिलाना कई परिवारों के लिए चुनौती बन जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस के लिए संपर्क करने के बावजूद कई बार समय पर मदद नहीं मिलती. इसी तरह की स्थिति में भीमापुरम के एक बीमार ग्रामीण को जवानों ने कांवड़ के सहारे रायगुडेम कैंप तक पहुंचाया. लगातार बारिश के बीच जवानों ने ग्रामीण को सुरक्षित कैंप तक पहुंचाया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया. इस घटना ने एक बार फिर दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का सवाल सामने ला दिया है. सुकमा जैसे भौगोलिक रूप से दुर्गम जिले में स्वास्थ्य सेवा केवल अस्पताल बनाने तक सीमित नहीं रह सकती. जरूरत इस बात की है कि आपातकालीन परिवहन व्यवस्था गांवों तक प्रभावी तरीके से पहुंचे. ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस सेवा की निगरानी और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए. दुर्गम इलाकों में समय पर इलाज की सुविधा मिले, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की जमीनी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है.

इंद्रावती से महादेव घाट तक आस्था की कांवड़
जगदलपुर. सावन के तीसरे सोमवार को जगदलपुर के महादेव घाट स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला. इंद्रावती नदी से पवित्र जल लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल हुए. सुकमा जमींदार कुमार जयदेव ने भी शिवभक्तों के साथ यात्रा में हिस्सा लिया और भगवान शिव का जलाभिषेक किया. यात्रा शुरू करने से पहले इंद्रावती नदी के तट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद कांवड़ में जल लेकर श्रद्धालु रामपाल लिंगेश्वर मंदिर की ओर रवाना हुए. रास्तेभर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा. महादेव घाट पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. महिलाओं ने भी कांवड़ यात्रा और पूजा-अर्चना में उत्साह के साथ भागीदारी निभाई. धार्मिक आयोजन में दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी प्रेम पाढ़ी सहित कई प्रमुख लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. कुमार जयदेव ने महादेव मंदिर को बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर करीब 200 वर्ष पुराना है और यहां स्थापित शिवलिंग लंबे समय से आस्था का केंद्र है. सावन में उमड़ने वाली भीड़ इस प्राचीन स्थल से लोगों के गहरे धार्मिक जुड़ाव को सामने लाती है. प्राचीन धार्मिक स्थलों को सुविधाजनक और सुलभ बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने की जरूरत भी इस आयोजन के दौरान सामने आई.
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