बस्ती में वाल्टरगंज थाने के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के मामले में पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग गिरोह का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. वहीं, शामली के अंकित बालियान हत्याकांड में फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए अफवाह फैलाने के मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं.

बस्ती/शामली. वाल्टरगंज थाना के पूर्व थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के मामले में पुलिस ने हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़े गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में गिरोह की मुख्य आरोपी महिला, उसके पिता और कानूनी सलाहकार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

कोतवाली पुलिस और सर्विलांस टीम ने रविवार सुबह 07:55 बजे सदर अस्पताल चौराहे के पास से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने उनके कब्जे से अपराध में इस्तेमाल की जाने वाली एक कार और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं.

ऐसे हुआ खुलासा

डीआईजी संजीव त्यागी ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल और अन्य जांच के आधार पर सामने आया कि थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह इस गिरोह के निशाने पर थे. 29 अगस्त 2026 को घटना वाले दिन आरोपी वकील विजय प्रकाश ने दोपहर 1:41 बजे उन्हें फोन किया था.

डीआईजी के मुताबिक, लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर सूर्य प्रकाश सिंह ने अपनी जान दे दी थी. जांच में सामने आया कि गिरोह संपन्न और रसूखदार लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे ब्लैकमेलिंग के जरिए रकम वसूलता था.

महिला करती थी ब्लैकमेल

पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी की उम्र 32 वर्ष है. वह पिछले 10 साल से अपने पति से अलग रह रही थी और मुंबई में ब्यूटी पार्लर व स्पा सेंटरों में काम करती थी.

पुलिस का कहना है कि प्रियंका लोगों को अपने जाल में फंसाती थी. इसके बाद वीडियो कॉल पर अपने हाथ की नस काटकर खून बहने का नाटक करती थी, जिससे सामने वाला भावनात्मक रूप से डर जाता था.

इस पूरे मामले में प्रियंका के पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव की भी भूमिका बताई गई है. पुलिस के अनुसार, कानूनी दांव-पेच से डराने और वसूली की योजना वकील विजय प्रकाश तैयार करता था.

जांच में यह भी सामने आया कि प्रियंका ने सूर्य प्रकाश सिंह को अपने जाल में फंसाकर उनके साथ संबंध बनाए और उसका वीडियो बना लिया था. इसके बाद आरोपी उस वीडियो के जरिए उनसे एक करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे.

घटना वाले दिन भी आरोपी वकील ने थानाध्यक्ष को फोन कर पैसे मांगे थे. साथ ही उन्हें डराया था कि युवती आत्महत्या करने जा रही है. पुलिस के मुताबिक, इसी ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर सूर्य प्रकाश सिंह ने खुदकुशी कर ली थी.

कई लोगों से वसूली

डीआईजी ने बताया कि जांच के दौरान गिरोह द्वारा अब तक लाखों रुपये की धनउगाही किए जाने का ब्यौरा मिला है. गिरोह ने अपने ही मकान मालिक डॉ. उमेश को जाल में फंसाकर 4 लाख रुपये ऐंठे थे.

इसके अलावा ड्राइवर अहमद रज़ा से 5 लाख रुपये की उगाही की गई थी. मध्य प्रदेश के व्यापारी आर्यन दीक्षित को भी जाल में फंसाकर 15 लाख रुपये की रकम वसूली गई थी.

डीआईजी ने बताया कि इस गिरोह के शिकार बने दर्जनों अन्य लोगों के संबंध में भी जांच तेजी से चल रही है. आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों का खुलासा हो सकता है. फिलहाल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.

फेक अकाउंट्स पर कार्रवाई

शामली में हुए हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड में फरार शूटरों की गिरफ्तारी पुलिस के सामने चुनौती बनी हुई है. इसी बीच सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट्स के जरिए आम जनता में खौफ और दहशत फैलाने की कोशिश का मामला भी सामने आया है.

पुलिस ने ऐसे करीब 15 से 16 सोशल मीडिया अकाउंट्स को चिन्हित किया है. इन फेक अकाउंट्स के संबंध में साइबर थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं.

अपर पुलिस अधीक्षक सुमित शुक्ला ने बताया कि अंकित बालियान हत्याकांड में दो शूटर पुलिस मुठभेड़ में ढेर किए जा चुके हैं, जबकि दो अन्य शूटर अभी फरार हैं. फरार शूटरों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है.

उन्होंने बताया कि हत्याकांड की आड़ में विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए लगातार भड़काऊ सामग्री पोस्ट की जा रही है. इसे रोकने के लिए साइबर सेल काम कर रही है.

अफवाहों से बचने अपील

अपर पुलिस अधीक्षक ने जनपदवासियों और आम नागरिकों से सोशल मीडिया पर फैल रही किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व फेक नैरेटिव सेट करके शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ना चाहते हैं.

उन्होंने बताया कि पुलिस चिन्हित हैंडल्स को संचालित करने वाले वास्तविक लोगों की पहचान करने में जुटी है. पुलिस इनके पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी.