हेमंत शर्मा, इंदौर। स्वच्छता में देश भर में परचम लहराने के बाद अब इंदौर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में भिक्षावृत्ति पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया है। शहर में भिक्षावृत्ति को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रशासन ने जनता के सहयोग से एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसके तहत भिक्षुओं के संबंध में सही सूचना देने वाले नागरिक को 1 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

भीख देना और भिक्षुओं से सामान खरीदना भी अपराध

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब इंदौर में न केवल भीख मांगना प्रतिबंधित है, बल्कि नागरिकों द्वारा भिखारियों को भीख देना भी पूरी तरह रोक दिया गया है। इसके अलावा, चौराहों या सड़कों पर भिक्षुओं से किसी भी प्रकार की सामग्री या सामान खरीदने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।

सूचना देने पर मिलेगा 1,000 रुपये का इनाम

भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों की सही जानकारी देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। सूचना नागरिक भिक्षावृत्ति से संबंधित सटीक सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा के मोबाइल नंबर 9691494951 पर दे सकते हैं। दी गई सूचना सही पाए जाने पर सूचनाकर्ता को प्रोत्साहन स्वरूप 1,000 रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा।

उल्लंघन करने पर BNS धारा 223 के तहत कार्रवाई

प्रशासनिक आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे इंदौर जिले में लागू कर दिया गया है और 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इंदौर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने में अपना सहयोग दें।

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