बेगूसराय। एटीएम मशीन में कार्ड फंसने की एक छोटी सी तकनीकी खराबी ने एक महिला की जमा-पूंजी पर डाका डाल दिया। शहर के जीडी कॉलेज रोड स्थित बजरंग चौक के पास एसबीआई एटीएम में प्रमिला देवी नाम की महिला के साथ हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। ठगों ने बड़ी चतुराई से महिला को अपना शिकार बनाया और उनके खाते से 22,500 रुपये उड़ा लिए।

​मदद के जाल में फंसी महिला

​पीड़िता अपने बच्चों के साथ पैसे निकालने पहुंची थी। जैसे ही उन्होंने कार्ड इंसर्ट किया, वह मशीन में फंस गया। महिला घबरा गई तभी वहां घात लगाए खड़े एक युवक ने मदद के बहाने प्रवेश किया। उसने महिला को कार्ड खींचने से मना किया और केबिन में चिपके एक फर्जी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने का झांसा दिया। ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर महिला को दूसरे स्थान पर भेज दिया ताकि वे आसानी से कार्ड निकालकर पिन के जरिए पैसे निकाल सकें। जब महिला वापस लौटी, तो कार्ड गायब था और खाते से राशि कट चुकी थी।

​सीसीटीवी और हेल्पलाइन बनी बेअसर

​पीड़िता ने बताया कि उसने तुरंत मदद के लिए 112 और एटीएम केबिन में लिखे रतनपुर थाना के नंबर पर फोन किया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने भी मदद के बजाय महिला की ही लापरवाही पर सवाल उठाए। पीड़िता का आक्रोश जायज है उनका कहना है कि जब एटीएम केबिन में सीसीटीवी लगा है तो पुलिस फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान क्यों नहीं कर रही? आरोपी बिना किसी डर के खुले चेहरे के साथ घूम रहे थे जो पुलिस की गश्त पर बड़ा सवालिया निशान है।

​सुरक्षा की अनदेखी और स्थानीय लोगों का गुस्सा

​स्थानीय दुकानदारों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। सुरक्षा गार्ड की अनुपस्थिति के कारण अब तक करीब 20 लोगों को इसी तरह ठगा जा चुका है। लोगों का कहना है कि बैंक प्रबंधन की घोर लापरवाही के चलते गरीब लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं। यदि तत्काल गार्ड की नियुक्ति नहीं की जाती है तो ऐसे एटीएम को बंद कर देना ही बेहतर है ताकि भविष्य में कोई और परिवार बर्बाद न हो।
​इस घटना ने एक बार फिर बैंकिंग सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर अपराधियों की धर-पकड़ करनी चाहिए और एटीएम केंद्रों पर सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।