अजय शास्त्री, बेगूसराय। बेगूसराय में बिहार सरकार के सहयोग शिविर अभियान के बीच भाजपा के ही एक बड़े नेता का प्रशासन के खिलाफ सड़क पर धरना चर्चा का विषय बन गया। मामला वीरपुर थाना क्षेत्र के गाड़ा चौक का है, जहां भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवानंद कुशवाहा अपने घर के रास्ते को अवरुद्ध किए जाने से नाराज होकर सड़क पर बैठ गए। उनका आरोप है कि गांव के कुछ दबंगों ने रास्ते पर लकड़ी गिराकर आवागमन बंद कर दिया है और कई बार थाना, सीओ, डीएसपी से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप
धरने पर बैठे भाजपा नेता ने प्रशासन पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि, जब भाजपा प्रदेश प्रवक्ता की बात नहीं सुनी जा रही है, तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी? उन्होंने कहा कि उन्होंने गांव और समाज के विकास के लिए कई जगह अपनी जमीन देकर रास्ता बनवाया, लेकिन आज उन्हीं का रास्ता बंद कर दिया गया है।
देवानंद कुशवाहा ने रामकुमार और विनोद कुमार नामक लोगों पर सरकारी जमीन को कब्जा कर रास्ता रोकने और रंगदारी मांगने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अंचल प्रशासन पहले मापी कर रास्ता खाली करा चुका है, लेकिन दोबारा रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया।
सीओ के आश्वासन देने पर शांत हुआ मामला
धरने के दौरान भाजपा नेता ने साफ कहा कि जब तक रास्ता खाली नहीं कराया जाएगा, तब तक वह सड़क से नहीं हटेंगे। करीब तीन घंटे तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद वीरपुर थाना पुलिस और अंचल अधिकारी मौके पर पहुंचे। सीओ ने रास्ता अवरुद्ध करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
सहयोग शिविर को लेकर पक्ष-विपक्ष की नजरिया
सरकार के इस अनूठी पहल ‘सहयोग शिविर’ का सत्ता पक्ष के नेताओं ने पुरजोर स्वागत कर रहे हैं। जदयू नेता और डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि, यही असली लोकतंत्र और प्रजातंत्र है, जहां शासन खुद जनता के पास पहुंच रहा है।
एक तरफ जहां एनडीए के नेता ‘सहयोग शिविर’ की तारीफ कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष सरकार के इस कार्यक्रम को लेकर उसकी मंशा पर सवाल उठा रहा है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इसे राजनीतिक स्टंट करार देते हुए कहा कि, ‘सहयोग कार्यक्रम’ के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई, बदहाल कानून व्यवस्था और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर पूरी तरह विफल हो चुकी है और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे आयोजन कर रही है।
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