बेगूसराय। जिला मुख्यालय स्थित पावर हाउस चौक के पास नेशनल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक प्रसूता की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के सामने जमकर प्रदर्शन किया और नेशनल हाईवे (NH-31) को लगभग चार घंटे तक जाम रखा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
गलत इलाज और लापरवाही के गंभीर आरोप
मृतका के चचेरे भाई विवेक कुमार के अनुसार, प्रसूता नीतू कुमारी को सोमवार को प्रसव के लिए अस्पताल लाया गया था। आरोप है कि सदर अस्पताल में कार्यरत एक ऑपरेटर राजनारायण ने बहला-फुसलाकर उन्हें इस निजी अस्पताल में भेजा था। परिजनों का कहना है कि अस्पताल में बिना किसी उचित जांच और कागजी प्रक्रिया के मरीज को भर्ती कर लिया गया।
रात में ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी कराई गई, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) न रुकने पर डॉक्टरों ने बिना परिजनों की सहमति के दोबारा ऑपरेशन कर उसकी बच्चेदानी (यूट्रस) तक निकाल दी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कोई भी योग्य या प्रशिक्षित डॉक्टर मौजूद नहीं था, बल्कि अनुभवहीन कर्मियों से इलाज कराया जा रहा था। जब महिला की हालत गंभीर हो गई और उसकी मौत हो गई, तो अस्पताल प्रबंधन ने कथित तौर पर पुलिस का डर दिखाकर परिजनों को रात 10 बजे बारिश के बीच शव के साथ बाहर निकाल दिया।
कागजों में धांधली और तीखी मांगें
परिजनों ने अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज स्लिप दिखाते हुए बताया कि उस पर न तो मरीज का ब्लड प्रेशर (बीपी) दर्ज है, न ही सही उम्र और किसी डॉक्टर के हस्ताक्षर। इस अमानवीय लापरवाही से गुस्साए लोगों ने आरोपी डॉक्टर नेहा कुमारी और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने मृतका के परिवार के लिए 10 लाख रुपये मुआवजे और दोषी अस्पताल को तुरंत सील करने की मांग को लेकर एनएच-31 फोरलेन को जाम कर दिया। चार घंटे तक चले इस भारी हंगामे और सड़क जाम के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
मौके पर पहुंचे सदर बीडीओ रविशंकर कुमार ने स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि नीतू कुमारी की मौत ऑपरेशन के दौरान हुई है। परिजनों ने सीधे तौर पर डॉक्टरों की लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामला काफी संदिग्ध प्रतीत होता है और परिजनों द्वारा दिए जाने वाले लिखित आवेदन के आधार पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


