अजय कुमार शास्त्री, बेगूसराय। बिहार केशरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह यानी श्री बाबू की प्रतिमा स्थापना को लेकर बेगूसराय में सियासी तापमान बढ़ता नजर आ रहा है। श्री बाबू की प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर रविवार की शाम को दलित-महादलित समुदाय के नेताओं और समर्थकों ने विशाल मशाल जुलूस निकाला। हाथों में मशाल और श्री बाबू के समर्थन में नारे लगाते हुए बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे।
श्रीकृष्ण सिंह की प्रतिमा स्थापित करने की मांग
जुलूस के दौरान नेताओं ने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह केवल एक नेता नहीं, बल्कि बिहार के गौरव और बेगूसराय की पहचान हैं। बेगूसराय की धरती उनकी कर्मभूमि रही है और यहां से उनका ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। ऐसे में बेगूसराय में श्री बाबू की भव्य प्रतिमा स्थापित होना सम्मान और गौरव का विषय है।
मशाल जुलूस में शामिल नेताओं ने श्रीकृष्ण सिंह की प्रतिमा स्थापना को लेकर सरकार और प्रशासन से जल्द पहल करने की मांग की। नेताओं का कहना था कि बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने सामाजिक न्याय, शिक्षा, औद्योगिक विकास और बिहार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसलिए उनकी स्मृति को संरक्षित करना समाज की जिम्मेदारी है।
गिरिराज सिंह को खुलेआम सरकार गिराने की दी धमकी
इस दौरान नेताओं ने भामाशाह की प्रतिमा स्थापना को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी महापुरुष के सम्मान का वे विरोध नहीं करते, लेकिन बिहार के लिए श्रीकृष्ण सिंह का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नेताओं ने कहा कि यदि भामाशाह की प्रतिमा राजस्थान में स्थापित की जाती है तो उसका अपना ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ है, लेकिन बिहार की धरती पर श्री बाबू के सम्मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भामा साह की प्रतिमा स्थापित करने के संदर्भ में स्थानीय सांसद गिरिराज सिंह द्वारा लिखे गए पत्र के विरोध में उन्हें खुलेआम सरकार गिराने की धमकी दी है।
श्रीकृष्ण सिंह को बताया धरोहर और गुमान
नेताओं ने कहा कि “श्री बाबू (श्रीकृष्ण सिंह) हमारे लिए अभिमान हैं, गुमान हैं और बेगूसराय की धरोहर हैं।” उन्होंने मांग की कि बेगूसराय में प्रमुख स्थान पर श्री बाबू की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान और विचारों से परिचित हो सकें।
मशाल जुलूस के दौरान समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का संकेत दिया। अब देखना होगा कि श्री बाबू की प्रतिमा को लेकर उठी यह मांग राजनीतिक गलियारों में कितना असर डालती है और सरकार व जिला प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है?
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