Dharm Desk – देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में आस्था का एक ऐसा दरबार है. जहां न्याय के लिए अदालत नहीं, बल्कि भगवान के सामने गुहार लगाई जाती है. घोड़ाखाल गोलू देवता मंदिर और चिताई गोलू देवता मंदिर को ‘चलता-फिरता कोर्ट’ कहा जाता है. इस स्थान पर भक्त कागज पर अपनी याचिकाएं लिखकर टांग देते हैं.

आस्था का अनोखा दरबार
गोलू देवता, जिन्हें भगवान शिव का रूप माना जाता है न्याय देते है. अदालतों से निराश लोग यहां स्टांप पेपर तक पर अपनी शिकायत लिखकर लगाते है. विश्वास इतना गहरा है कि फैसले के बाद भक्त धन्यवाद स्वरूप घंटी चढ़ाते हैं.
घंटियों में छिपी हजारों कहानियां
घोड़ाखाल मंदिर की पहचान वहां लटकी लाखों घंटियों से है. पेड़ों, दीवारों और छतों पर सजी ये घंटियां हर उस मनोकामना की गवाही देती है, भक्तों कि जो पूरी हुई. जब हवा चलती है, तो इन घंटियों की ध्वनि पूरे परिसर को दिव्य बना देती है.
लोककथा: जब भगवान ने दिलाया न्याय
लोककथाओं के अनुसार, अल्मोड़ा के एक किसान राम सिंह ने जमीन विवाद से परेशान होकर मंदिर में याचिका लगाई. कुछ ही महीनों में उनका विवाद सुलझ गया. इसके बाद उन्होंने मंदिर में घंटी चढ़ाकर भगवान का आशीर्वाद लिया. ऐसी कई कहानियां यहां आज भी सुनाई देती हैं.
गोलू देवता की कथा
मान्यता है कि गोलू देवता, गौर भैरव का रूप हैं. उनका जीवन न्याय और सत्य के लिए समर्पित रहा. कुमाऊं में उन्हें आज भी न्याय के देवता और लोक आस्था के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है.
कैसे पहुंचे
चिताई मंदिर अल्मोड़ा से 8-10 किमी दूर है, जबकि घोड़ाखाल मंदिर भवाली के पास स्थित है. नजदीकी रेलवे स्टेशन, काठगोदाम रेलवे स्टेशन (110 किमी) और हवाई अड्डा पंतनगर एयरपोर्ट है. यहां टैक्सी या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता हैं.
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