कुंदन कुमार/पटना। राजधानी के बेऊर थाना क्षेत्र में बीते 30 मई 2026 को बाईपास के किनारे मिले आनंद कुमार के शव मामले का पटना पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आनंद की हत्या कोई सामान्य अपराध नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी जिसे जमीन विवाद के कारण सुपारी देकर अंजाम दिया गया था।

​पारिवारिक रंजिश बनी जान की दुश्मन

​मृतक आनंद कुमार जो मूल रूप से पैठानी नत्थुपुर का रहने वाला था और वर्तमान में अपनी ससुराल के पास किराए के मकान में रह रहा था की हत्या के पीछे मुख्य कारण पारिवारिक जमीन विवाद था। पुलिस के अनुसार आनंद और मुख्य आरोपित उमेश कुमार उर्फ सुटाली राय के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर खींचतान चल रही थी। इसी विवाद को खत्म करने के लिए आनंद की हत्या की सुपारी दी गई थी।

​एसआईटी का गठन और त्वरित कार्रवाई

​नगर पुलिस अधीक्षक (पश्चिम) साकेत कुमार के निर्देशानुसार, फुलवारीशरीफ के एसडीपीओ-1 के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जाल बिछाया। सबसे पहले 4 जून को उमेश कुमार उर्फ सुटाली राय की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद पुलिस ने शास्त्रीनगर निवासी राजीव कुमार, पैठानी नत्थुपुर के आदर्श कुमार उर्फ गोलू, समपतचक के रौशन कुमार और शाहपुर निवासी गौरी शंकर को गिरफ्तार किया।

​शूटरों की पहचान और कानून का शिकंजा

​पूछताछ के दौरान आरोपितों ने स्वीकार किया कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए शूटर गोनू कुमार, प्रिंस कुमार और मयंक कुमार को काम पर रखा गया था। गौरतलब है कि ये तीनों शूटर पहले से ही दीदारगंज थाना कांड संख्या 104/26 में न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
​इस मामले में बेऊर थाना कांड संख्या 320/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 3(5) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। गिरफ्तार सभी चारों आरोपितों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले की आगे की कड़ियों को जोड़ने के लिए दीदारगंज जेल में बंद शूटरों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।