Dharm Desk – देवाधिदेव महादेव के अश्रुओं से निर्मित पवित्र रुद्राक्ष को साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। जो साधक निष्ठा पूर्वक रुद्राक्ष धारण करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, रोग और भय का विनाश हो जाता है परंतु क्या आप जानते हैं कि अनजाने में की गई कुछ गलतियां इस दिव्य रुद्राक्ष को निष्फल ही नहीं, बल्कि आपके लिए हानिकारक भी बना सकती हैं? शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि रुद्राक्ष के नियमों का कठोरता से पालन न किया तो यह विपरीत प्रभाव भी दिखा सकता है।

जानिए रुद्राक्ष से जुड़े ऐसे ही गुप्त एवं महत्वपूर्ण नियम

अशुद्ध अवस्था में रुद्राक्ष स्पर्श कनार महादोष

    बहुत से लोग दिन-रात रुद्राक्ष पहने रहते है जो कि सर्वथा अनुचित है। शास्त्रों के अनुसार, श्मशान घाट, शव यात्रा अथवा किसी शिशु के जन्म के समय (सूतक काल) के दौरान रुद्राक्ष धारण करना वर्जित माना है। इसके अतिरिक्त, स्त्रियों को मासिक धर्म के दौरान तथा दंपत्तियों को शारीरिक संबंध बनाते समय इसे तुरंत उतार देना चाहिए, ऐसी स्थिति में रुद्राक्ष की पवित्रता भंग होती है।

    सोने से पहले तकिये के नीचे रखे

    क्या आप जानते हैं कि, सोते समय रुद्राक्ष पनहना क्यों वर्जित है? विश्राम के समय शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ने के कारण रुद्राक्ष टूट या चटक सकता हैl जिससे इसका दिव्य प्रभाव समाप्त हो जाता है। अतः रात्रि को सोने से पूर्व इसे आदरपूर्वक उतारकर अपने तकिये के नीचे रख दें, जिससे स्वप्न दोष दूर होते हैं और अनिद्रा की समस्या समाप्त होती है।

    मंत्र जाप की माला और पहनने की माला में अंतर

    अधिकतर लोग जिस माला से भगवान शिव के नाम का जप करते हैं, उसी को गले में धारण कर लेते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह एक भयंकर भूल है! जाप करने वाली माला और शरीर पर धाणर की जाने वाली माला सदैव अलग-अलग होनी चाहिए।

    सरसों या तिल के तेल से अनिवार्य मालिश

      रुद्राक्ष को जीवित और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए इसकी देख-रेख आवश्यक है। समय-समय पर मुलायम ब्रश से इसकी सफाई करें और सरसों या तिल जैसे कड़वे तेल से इसकी निमियात मालिश करें। इससे रुद्राक्ष की शक्ति बनी रहती है और यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

      खान-पान और शुद्धता का नियम

        रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को तामसिक भोजन (मांस, मछली आदि) तथा मदिरा व अन्य सभी प्रकार के व्यसनों का पूर्णतः त्याग कर देना चाहिए, जो व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, उसे महादेव के कोप का भाजन बनना पड़ सकता है।

        त्वचा पर एलर्जी हो तो क्या करना है

        रुद्राक्ष की प्रकृति अत्यंत उष्ण (गर्म) होती है। कई बार संवेदन शील त्वचा वाले लोगों को इसे पनहने पर एलर्जी या दाने होने लगते हैं। ऐसे साधकों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है वे रुद्राक्ष को अपने पूजा घर में स्थापित कर नियमित रूप से उसका पूजन और दर्शन कर सकते है।

        धारण करने की सही विधि

          रुद्राक्ष को सदैव सिद्ध (प्राण-प्रतिष्ठा) कराने के पश्चात ही धारण करना चाहिए। इसे धारण करने के लिए पूर्णिमा अमावस्या, संक्रांति या ग्रहण काल का पर्व अत्यंत शुभ माना है। इसे सूती लाल,पीले धागे, स्वर्ण या चांदी की चेन में पिरोकर पहनना सर्वोत्तम होता है। सुबह पहनते समय और रात में उतारते समय ‘रुद्राक्ष मंत्र’ तथा ‘उत्पत्ति मंत्र’ का 9 बार जाप अवश्य करना चाहिए।