भागलपुर। बिहार के चर्चित भागलपुर बम ब्लास्ट मामले में अदालत ने घटना के चार साल बाद एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायिक पदाधिकारी ज्योति कुमार कश्यप की अदालत ने इस मामले में दो प्रमुख दोषियों, मोहम्मद आजाद और नवीन मंडल को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। यदि दोषी जुर्माने की राशि अदा करने में असफल रहते हैं, तो उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस कठोर निर्णय से कानूनी प्रणाली की प्रतिबद्धता साफ झलकित होती है कि अवैध गतिविधियों और विस्फोटक बनाने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।
घटना का विवरण
यह दर्दनाक घटना 3 मार्च 2022 की देर रात भागलपुर जिले के ततारपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले काजवलीचक इलाके में घटी थी। एक रिहायशी मकान के भीतर अवैध रूप से बम बनाने का खतरनाक खेल चल रहा था, इसी दौरान अचानक एक जोरदार विस्फोट हो गया। यह धमाका इतना भीषण था कि इसके असर से आसपास के कई मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए और मलबे में तब्दील हो गए। इस भयानक हादसे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और स्थानीय लोगों में भारी दहशत का माहौल पैदा कर दिया था।
14 लोगों की हुई थी मौत और राहत कार्य
इस खौफनाक बम विस्फोट में कुल 14 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, जबकि लगभग 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन, दमकल विभाग और एनडीआरएफ की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। इस बड़ी दुर्घटना ने अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री रखने और बनाने के खतरों को एक बार फिर से देश के सामने ला खड़ा किया था।
अदालती कार्रवाई और न्यायिक फैसला
इस पूरे मामले में पुलिस ने कुल सात लोगों को आरोपी के रूप में नामजद किया था। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के दौरान दो आरोपियों की मृत्यु हो गई, जिसके बाद शेष पांच आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा नियमित रूप से चला। अदालत ने उपलब्ध कराए गए सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों, दस्तावेजी प्रमाणों और गवाहों के बयानों का बारीकी से अध्ययन और परीक्षण किया। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि मोहम्मद आजाद और नवीन मंडल के खिलाफ आरोप पूरी तरह से सिद्ध पाए गए।
सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया और संदेश
सरकारी पक्ष की तरफ से इस महत्वपूर्ण मामले की पैरवी लोक अभियोजक (पीपी) हेमा कांत झा द्वारा की गई। उन्होंने अदालत के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अपने मजबूत तर्कों और वैज्ञानिक साक्ष्यों से अदालत के सामने सत्य को स्थापित किया। यह फैसला समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि कानून ऐसे गंभीर अपराधों और अवैध विस्फोटक निर्माण में लिप्त तत्वों के खिलाफ बेहद सख्ती से पेश आता है। यह निर्णय पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक बहुत बड़ा और सराहनीय कदम साबित हुआ है।


