अतीश दीपंकर, भागलपुर। जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक ऐसे पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट को गिरफ्तार किया है, जो भोले-भाले ग्रामीणों की जानकारी के बिना धोखाधड़ी कर अवैध तरीके से सिम कार्ड जारी करता था और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचता था। आरोपी की पहचान ईशाकचक थाना क्षेत्र के बरहपुरा निवासी मोहम्मद अब्दुल मतीन के रूप में हुई है, जिसे पुलिस ने तिलकामांझी थाना क्षेत्र के कचहरी चौक से दबोचा। इस मामले ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि किस प्रकार तकनीक का दुरुपयोग कर आम लोगों को आपराधिक गतिविधियों में घसीटा जा रहा है।

​कैसे चलता था फर्जी सिम का यह पूरा खेल?

​साइबर थाना के डीएसपी विनय कुमार रंजन ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस पूरे षड्यंत्र का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद अब्दुल मतीन एक अधिकृत POS एजेंट था। वह ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को सिम पोर्ट कराने या अन्य सरकारी योजनाओं का झांसा देता था।
​जब ग्रामीण अपनी सहमति देते थे, तो आरोपी उनके बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान) का इस्तेमाल कर एक से अधिक सिम कार्ड या अनधिकृत रूप से नए कनेक्शन जारी कर लेता था। ग्रामीण इस बात से पूरी तरह अनजान रहते थे कि उनके नाम पर जारी इन सिम कार्डों का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। पिछले महज छह महीनों के भीतर ही आरोपी ने इस तरीके से करीब 81 फर्जी सिम कार्ड जारी किए थे।

​122 साइबर अपराधों में हुआ सिम का इस्तेमाल

​पुलिस की शुरुआती जांच और तकनीकी विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अब्दुल मतीन द्वारा बेचे गए इन 81 फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल झारखंड और पश्चिम बंगाल के शातिर साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। इन राज्यों से संचालित होने वाले कुल 122 साइबर अपराधों के मामलों में इन्हीं सिम कार्डों की संलिप्तता पाई गई है।
​आरोपी इस अवैध कारोबार में अकेला नहीं था; पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह अपने सहयोगी मोहम्मद अफताब की मदद से इन सिम कार्डों को साइबर ठगों तक पहुंचाता था। पुलिस अब मोहम्मद अफताब और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

​पुलिस की सख्त कार्रवाई और आगे की रणनीति

​इस सनसनीखेज मामले में साइबर थाना में कांड संख्या 61/26 दर्ज कर ली गई है और कानून के मुताबिक आगे की सख्त कार्रवाई की जा रही है। डीएसपी विनय कुमार रंजन ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों (कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल फुटप्रिंट्स) के आधार पर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
​भागलपुर पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि जिन ग्रामीणों के नाम पर फर्जी सिम जारी किए गए हैं, उन्हें किसी भी कानूनी पचड़े में न फंसना पड़े। साथ ही, जिला प्रशासन सभी टेलीकॉम कंपनियों और POS एजेंटों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।