नई दिल्ली/ कुंदन कुमार/ भोजपुर। जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता को पहले संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी। याचिका में एनकाउंटर की सीबीआई जांच कराने और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दायर की गई थी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि उन्होंने किस हैसियत से यह याचिका दाखिल की है। अदालत ने कहा कि इस मामले में उचित मंच हाईकोर्ट है और वहीं जाकर अपनी बात रखी जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
नियमित प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था
इससे पहले भी जब मामले का उल्लेख जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया था, तब भी अदालत ने तत्काल सुनवाई से मना करते हुए याचिकाकर्ता को रजिस्ट्री के माध्यम से नियमित प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था। याचिका में मांग की गई थी कि 17 जून को भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि कथित फर्जी एनकाउंटर लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं तथा ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि एनकाउंटर से कुछ घंटे पहले भरत भूषण तिवारी ने फेसबुक लाइव के जरिए कथित तौर पर अपनी कुछ मांगें पूरी होने पर आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई थी। इसके बावजूद उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हुए। घटना के बाद ग्रामीणों ने भी विरोध-प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
पुलिस ने गोली मार दी
याचिका में मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी के दावों का भी जिक्र किया गया है। उनका कहना है कि उनके बेटे के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड, एफआईआर या चार्जशीट नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आत्मसमर्पण की स्थिति बनने के बावजूद पुलिस ने गोली मार दी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और मामले को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया अब हाईकोर्ट में जारी रह सकती है।

