Bihar News: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद IPS राजेश कुमार शर्मा के तबादले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी ने कहा कि, सही तरीके से सुनवाई और कार्रवाई नहीं हो रही है। यही सच्चाई है। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी) की अनुमति के बिना कोई भी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं करता। किसी वरिष्ठ अधिकारी ने ही संदेश भेजा होगा, और उसके बाद ही भरत तिवारी का एनकाउंटर हुआ।
नामजद राजेश कुमार शर्मा को मिली है नई जिम्मेदारी
बिहार सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 12 आईपीएस अधिकारियों और 53 डीएसपी का तबादला किया है। इसी क्रम में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद रहे तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। लाइन हाजिर किए जाने के बाद अब उनका तबादला पुलिस उपाधीक्षक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में कर दिया गया है, जिसे लेकर तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है।
परिवार कर रहा है कि गिरफ्तारी की मांग
ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि जब भरत तिवारी की मां आशा देवी के बयान के आधार पर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद रहे तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, एसएचओ राजेश मालाकार समेत अन्य के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। परिवार लगातार उनके खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग कर रहा है, तो ऐसे में उनका पटना तबादला होने पर एक नई बहस छिड़ गई है।
रोहिणी आचार्य ने भी उठाए सवाल
तेजस्वी यादव के अलावा उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने भी एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा के तबादले पर सवाल उठाया है। रोहिणी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, हत्या के नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को पुरस्कृत कर दिया सम्राट सरकार ने।
रोहिणी आचार्य ने कहा कि, जवईनिया गांव के गरीब विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाले , भोजपुर प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की बात करने वाले युवक भरत तिवारी की फर्जी पुलिसिया मुठभेड़ में की गयी हत्या के मामले में नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को नयी जिम्मेदारी सौंपा जाना, पुरस्कृत किए जाने के समान है। सम्राट सरकार के इस हैरान कर देने वाले फैसले से ही भरत तिवारी के परिजनों व् ग्रामीणों के द्वारा लगाया गया ये आरोप साबित होता दिखता है कि फर्जी मुठभेड़ को सत्ता शीर्ष , पुलिस उच्चाधिकारियों व् स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति प्राप्त थी।
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