Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026 के बीच भरतपुर के वार्ड नंबर 19 में अजीब राजनीतिक स्थिति सामने आई है। यहां भाजपा और कांग्रेस, दोनों प्रमुख दलों ने मनोज सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। मनोज सिंह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं और वार्ड से दो बार कांग्रेस के टिकट पर पार्षद भी रह चुके हैं। हालांकि, इस बार उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और भाजपा से पार्षद पद के लिए आवेदन किया था।

पहले कांग्रेस में मांगा टिकट, फिर BJP में हुए शामिल

मनोज सिंह भरतपुर के वार्ड 19 में पुराने कांग्रेसी नेता रहे हैं। वह लंबे समय तक पार्टी के संगठनात्मक पदों पर भी रहे। इससे पहले वह कांग्रेस के टिकट पर दो बार पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं।

इस बार नगर निकाय चुनाव के लिए उन्होंने शुरुआत में कांग्रेस से टिकट के लिए आवेदन किया था। बाद में उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने भाजपा से भी पार्षद पद के लिए आवेदन किया।

BJP ने बनाया प्रत्याशी, कांग्रेस ने भी घोषित किया नाम

मनोज सिंह के भाजपा में जाने के बाद भाजपा ने उन्हें वार्ड 19 से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसी बीच कांग्रेस की सूची में भी उनका नाम सामने आने से मामला चर्चा में आ गया। एक ही वार्ड से दो प्रमुख दलों की ओर से एक ही व्यक्ति को प्रत्याशी बनाए जाने की स्थिति ने स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी।

हालांकि, मनोज सिंह ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा ने उन पर भरोसा जताया है और उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित किया है। इसलिए वह अब भाजपा के टिकट पर ही पार्षद पद का चुनाव लड़ रहे हैं।

कांग्रेस ने किया पार्टी से निष्कासित

मनोज सिंह के भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद जिला कांग्रेस कमेटी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। कांग्रेस ने उन्हें पार्टी के साथ विश्वासघात और घोर अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया।

अब वार्ड 19 में मनोज सिंह भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस की ओर से उनके नाम को लेकर बनी स्थिति ने राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026 में टिकट वितरण और दल-बदल की राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

वार्ड 19 का मामला क्यों है खास?

भरतपुर के वार्ड 19 में सामने आया यह मामला इसलिए खास है क्योंकि मनोज सिंह का कांग्रेस से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। वह इसी पार्टी के टिकट पर दो बार पार्षद रह चुके हैं। इस बार उनका भाजपा में जाना और भाजपा की ओर से प्रत्याशी बनाया जाना स्थानीय चुनाव में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

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